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केंद्र सरकार ने ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के साथ बैठक के बाद लिया फैसला...ट्रक-बस ड्राइवरों की हड़ताल खत्म

रायपुर- हिट एंड रन केस को लेकर सोमवार और मंगलवार को ट्रक-बस ड्राइवरों की हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिला, इसी बीच छत्तीसगढ़ में भी पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारे लगती हुई नजर आई थी। हिट एंड रन के नए कानून को लेकर ट्रक और बस ड्राइवरों ने विरोध जताया था और कानून को वापस लेने की बात कही थी। हालांकि 2 दिन बाद हड़ताल खत्म कर दी गई है। लेकिन 2 दिन तक चली इस हड़ताल ने लोगों को काफी परेशान कर दिया था।

हड़ताल का असर आम जनता पर कैसे पड़ा...

बता दें, केंद्र सरकार ने ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के साथ बैठक के बाद ऐलान किया है कि हिट एंड रन कानून फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा। इन सब के बीच अब देखना होगा की आगे सरकार क्या कदम उठाती है। वहीं दूसरी तरफ कई पंप ड्रिप होने की वजह से बंद करने पड़ गए थे। साथ ही सब्जी मिलना भी मुश्किल हो गई थी और अगर मिल भी गई तो उसके दाम आसमान पर थे। दरअसल, रायपुर में देश के अलग-अलग राज्यों से सब्जियां पहुंचती हैं। उन्हें रास्ते में ही रोक लिया गया था। किसानों के खेतों में पहुंचकर हड़ताल समर्थकों ने माल लोड ही नहीं होने दिया। हालांकि मंगलवार देर रात हड़ताल ख़त्म हो गई।


स्कूल बंद...ऑनलाइन पढ़ाई...

पेट्रोल पंप और सब्जियों के अलावा स्कूल में भी हड़ताल का असर देखने को मिला था। वहीं स्कूल और कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई करवाई गई थी। लेकिन आज से सभी स्कूल और कॉलेज खोल दिए जाएंगे।

हिट एंड रन के अब तक कितने केस...

राजधानी रायपुर की बात की जाए तो यहां पर एक साल में 247 मौत हुई है। जिसमें से बस और ट्रक की वजह से 62 लोगों की जान गई है। ट्रैफिक पुलिस की माने तो बस और ट्रक की जगह कार और छेटे वाहनों की वजह से हादसे ज्यादा हुए हैं। छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लगभग सभी राज्यों में ट्रकों या बाकी भारी वाहनों की तुलना में कार वाले हिट एंड रन के मामले में आगे हैं।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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