हिट एंड रन कानून पर केंद्र के भरोसे के बावजूद इंडस्ट्री को ट... - CG Sandesh

हिट एंड रन कानून पर केंद्र के भरोसे के बावजूद इंडस्ट्री को ट्रांसपोर्टर परेशान कर रहे

  • गृह मंत्रालय का पत्र : नया कानून लागू करने से पहले ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के साथ बातचीत होगी

कुछ निहित स्वार्थी तत्व ट्रक ड्राइवरों में असंतोष भड़का रहे हैं। पिछले दिनों भारतीय न्याय संहिता में हिट एंड रन के मामलों में दस साल की कैद और सात लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान करने के विरोध में आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की अगुआई में ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी थी। इसके कारण देश भर में अफरा-तफरी मच गई। तब केंद्र सरकार ने भरोसा दिया था कि नए कानूनी प्रावधान अभी लागू नहीं हुए हैं।

गृह मंत्रालय ने 8 जनवरी 2024 को आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष अमृतलाल मदान को पत्र लिखकर सूचित किया है कि भारतीय न्याय संहिता के प्रावधान अभी तक लागू नहीं किए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2) के तहत दस साल के कारावास और जुर्माने के संबंध में प्रतिनिधियों को भरोसे में लेकर ही इस बारे में अगला कदम उठाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद भी फैसला आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के साथ सलाह-मशविरे के बाद ही लागू किया जाएगा। मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था कि इस संबंध में दुबारा हड़ताल के आसार रोकने के लिए मंत्रालय अपने फैसले से अवगत कराए। इसी के जवाब में यह पत्र लिखा गया है।

हड़ताल तो स्थगित कर दी गई, लेकिन अभी भी ट्रांसपोर्ट यूनियनों में कुछ निहित स्वार्थी तत्व एक बार फिर
असंतोष उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह की बातें की जा रही हैं कि जब तक सरकार मोटर वाहन कानून में इन संशोधनों को वापस नहीं लेती है, तब तक ट्रांसपोर्टर चुप नहीं बैठेंगे। कुछ ट्रांसपोर्ट नेता ऐसे बयान दे रहे हैं कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों की तरह इन मोटर कानूनों को वापस लेने का ऐलान करे। हड़ताल वापस होने के बावजूद कई ट्रांसपोर्टर देश भर में व्यापारियों के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। अभी भी सामान इधर-उधर पहुंचाने में परेशानी खड़ी की जा रही है।

 

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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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