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प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृहमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं भारत के नवीन कानून : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत के तीन नवीन कानूनों को लेकर कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की दूरदर्शी सोच की वजह से ही ये संभव हो पाया है। साय ने कहा है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी हम अंग्रेजों के बनाए कानून का ही पालन कर रहे हैं जिसे बदलने का समय आ गया है। साय ने कहा है कि समय के साथ परिवर्तन अनिवार्य है और देश, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बेहतर परिवर्तन की ओर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज रायपुर के पुराना पुलिस मुख्यालय में नवीन कानूनों के प्रावधानों के प्रस्तुतिकरण में शामिल हुए और कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस को आने वाले समय में संसाधनों की कमी नहीं होगी और प्राथमिकता के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस को और सशक्त करेंगे। नवीन कानूनों के प्रावधानों के प्रस्तुतिकरण के मौके पर राज्य के गृहमत्री विजय शर्मा ने कहा कि बेहतर कानून व्यवस्था देश का एक अहम विषय है। उन्होंने नवीन कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय गृहमंत्री के प्रयासों से ये संभव हो पाया है कि हमें अंग्रेजों के कानून से मुक्ति मिलने जा रही है। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा ने मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री के समक्ष नवीन कानूनों के प्रावधानों की प्रस्तुति देते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023, नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। जुनेजा ने बताया कि नवीन कानून दंड देने की बजाए पीडि़त को न्याय देने की भावना के साथ तैयार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुराने कानून दंड पर आधारित हैं जबकि नए कानून महिला सुरक्षा एवं न्याय पर आधारित हैं।
नवीन कानूनों के प्रावधानों के प्रस्तुतिकरण के मौके पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव विधि रजनीश श्रीवास्तव, एडीजीपी विवेकानंद, एडीजीपी अमित कुमार, वित्त सचिव अंकित आनंद समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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