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सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की क्यों हुई मौत, अब चलेगा पता, जानें कैसे

रायपुर। सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत क्यों हुई। क्या मरीज देरी से इलाज कराने पहुंचा था, या उसका प्राथमिक उपचार समय पर नहीं किया गया। क्या इलाज के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई है। इन सबके बारे में सही जानकारी नहीं मिलती है। इस दौरान अस्पताल में हंगामे की नौबत तक आती है। अब इस ओर प्रशासन का ध्यान गया है।  

रायपुर संभागायुक्त डॉ. संजय अलंग ने संभाग के सभी जिला अस्पतालों सहित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत का डेथ ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस डेथ ऑडिट से मरीज के इलाज के विभिन्न चरणों का क्रमबद्ध ब्योरा पता लगेगा और इलाज के दौरान मृत्यु के कारणों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने तकनीकी रूप से मरीजों का गंभीरता से इलाज करने के निर्देश डॉक्टरों को दिए।

डॉ. अलंग ने शिशु मृत्यु, मातृ मृत्यु के साथ-साथ अन्य मरीजों की इलाज के दौरान मौतों को कम से कम करने के लिए सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश भी चिकित्सकों को दिए। संभागायुक्त ने गंभीर मरीजों को समय पर बड़े अस्पतालों को रेफर करने को भी कहा, ताकि समय पर उन्हें उचित इलाज मिल सके और उनका जीवन बचाया जा सके। इस महत्वपूर्ण बैठक में महासमुंद और रायपुर मेडिकल कॉलेजों के डीन, रायपुर एवं महासमुंद शासकीय अस्पतालों के अधीक्षक सहित मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन के कार्यपालन यंत्री, ब्लड बैंक के प्रभारी और यातायात पुलिस के उप पुलिस अधीक्षक भी शामिल हुए।


बैठक में डॉ. अलंग ने मेडिकल कॉलेजों में ऑपरेशन थियेटरों की व्यवस्था, सर्जिकल उपकरणों के साथ-साथ होने वाले ऑपरेशनों और विशेषज्ञ सर्जन डॉक्टरों की उपलब्धता की जानकारी भी ली। उन्होंने ऑपरेशन थियेटरों को संक्रमण मुक्त रखने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं और दवाएं-रसायन आदि की पर्याप्त मात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संभागायुक्त ने अस्पतालों में विभागवार मरीजों की भर्ती, संस्थागत प्रसव, दिन एवं रात में सामान्य एवं सिजेरियन प्रसवों का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए भी कहा।

डॉ. अलंग ने संस्थागत प्रसव को बढ़ाने के प्रयास भी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पतालों, स्वास्थ्य केन्द्रों सहित दवाओं एवं अन्य संस्थागत निर्माण से जुड़े स्वीकृत तथा लंबित कार्यों की जानकारी भी ली। डॉ. अलंग ने भूमि विवाद, निर्माण के लिए स्थल चयन ना होने जैसे कारणों को जल्द से जल्द निराकृत करने के लिए संबंधित जिले के कलेक्टरों को पत्र द्वारा तत्काल सूचित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। संभागायुक्त ने चिकित्सा अधोसंरचना विस्तार के शुरू हो चुके निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

एक फोन कॉल पर मिलेगी ग्रीन कॉरीडोर की व्यवस्था

 बैठक में संभागायुक्त ने जरूरत पड़ने पर ग्रीन कॉरीडोर बनाने की तैयारियों के बारे में भी यातायात पुलिस के अधिकारियों से जानकारी ली। यातायात पुलिस के उप अधीक्षक ने बताया कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति या अस्पताल एक फोन कॉल पर ग्रीन कॉरीडोर की सुविधा ले सकता है। गंभीर मरीजों के इलाज या ट्रांसप्लांट के लिए अंगों का परिवहन करने जिला प्रशासन-पुलिस प्रशासन हमेशा सजग और तैयार है। दुर्ग से लेकर रायपुर तक इसके लिए समर्पित आठ हाइवे पेट्रोलिंग टीम हमेशा तैनात रहती है।

ग्रीन कॉरीडोर बनाने इन नंबरों पर कर सकते हैं फोन

उप पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पिछले एक वर्ष में प्रशासन ने 57 बार ग्रीन कॉरीडोर बनाकर गंभीर मरीजों को ईलाज के लिए और अंगो को प्रत्यारोपण के लिए दूसरे शहरों में मरीजों तक निर्धारित समय सीमा से पहले पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर व्यक्ति या अस्पताल ग्रीन कॉरीडोर बनाने पुलिस कंट्रोल रूम के फोन नम्बर 94791-91099 या उप पुलिस अधीक्षक यातायात के शासकीय नम्बर 94791-91018 पर फोन कर मांग कर सकते हैं।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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