महासमुंद के ढाबा में जमकर मारपीट, दोनो पक्षों ने दर्ज करायी ... - CG Sandesh

महासमुंद के ढाबा में जमकर मारपीट, दोनो पक्षों ने दर्ज करायी शिकायत

महासमुंद के केसरिया ढाबा में ढाबा बंद होने के बाद खाना मांगने का विवाद इतना बढ़ गया कि होटल संचालक और ग्राहकों के बिच जमकर मारपीट हुई। इस मामले में होटल पक्ष ने युवाओं के खिलाफ बलवा और हत्या के प्रयास की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक होटल पक्ष ने पुलिस थाने में दर्ज शिकायत में बताया है कि ढाबा बंद होने के बाद स्टॉफ अपने होटल की पार्किंग में क्रिकेट खेल रहे थे। वहां पर कुछ लोग अपनी कार में आकर बोले कि खाना खिलाओ तब हम लोगों ने बताया कि ढाबा बंद हो गया है तो बोले कि ढाबा खुलवाओ और खाना बनाओ, खाना नहीं बन पायेगा बोलने पर उनके साथ जमकर मारपीट की।

एफआईआर के मुताबिक धीरज सरफराज, साहिल सरफराज और उनके अन्य 10-15 साथी ने होटल के स्टॉफ के साथ क्रिकेट बैट, लोहे की राड, धारदार हथियार व डण्डा से मारपीट की है।

इस मामले में धीरज सरफराज, साहिल सरफराज एवं अन्य 10-15 साथी के खिलाफ धारा 147, 148, 294, 323, 307 और 506 (बी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।


वहीं दूसरे पक्ष का दावा है कि (एफआईआर के मुताबिक) रात 1 बजे के बाद वे परिवार के साथ केसरिया ढाबा खाना खाने गए। वहां उनके बच्चे और परिवार के सदस्य क्रिकेट खेलने लगे। इस बीच रात 1.30 बजे वहां होटल स्टॉफ आए और क्रिकेट खेल रहे बच्चों से बोले कि हमारे साथ 20-20 हजार रुपए का दांव लगाकर क्रिकेट खेलो। जब उन्होंने दांव लगाने से मना किया तो इसी बात को लेकर उनके बीच तू-तू मैं-मैं हुई और विवाद हुआ। इस पक्ष का आरोप है कि इसी बीच संचालक रणधीर सिंह खनूजा ढाबे के अंदर साईड से अपने और अन्य कर्मचरियों के साथ दौड़ते हुए आए और उन्हें गालियां दी और ढाबे के अंदर से उसके अन्य कर्मचारी तलवार, राड व डंडा पहुंच गए और उनके साथ मारपीट की। पुलिस ने दूसरे पक्ष की शिकायत पर होटल संचालक रणधीर सिंह खनूजा, हरमीत सिंह खनूजा और अन्य साथी पर धारा 294, 323, 506, 326 और धारा 34 के तहत अपराध दर्ज किया है।

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पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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