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बसना : कलेक्टर महासमुन्द को आयुक्त रायपुर ने दिया जांच कर कार्यवाही का आदेश।

जिला पंचायत महासमुन्द के जिम्मेदार अधिकारियो पर आरोपित सचिवो को सरंक्षण देने का आरोप।

बसना। आरोपित पंचायत सचिव का एक प्रकरण में दोषसिद्वी होने के बाबजूद जिला पंचायत महासमुन्द के जिम्मेदार अधिकारियो के द्वारा जानबूझकर विभागीय संरक्षण देने का शिकायत निहारिका बारीक प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को किया गया है। जिस शिकायत को जांच के लिए आयुक्त रायपुर संभाग रायपुर को भेजा गया है। आयुक्त ने कलेक्टर महासमुन्द को शिकायतकर्ता के शिकायत की सभी बिन्दूओ में जांच करके कार्यवाही करने का आदेश दिया है।

मालूम है कि ग्राम पंचायत भोकलुडीह में रोहित पटेल पदस्थ थे। तब शिकायकर्ता विनोद कुमार दास ने सूचना का अधिकार के तहत आवेदन लगाकर जानकारी मांगा। पंचायत सचिव ने दस्तावेज शुल्क राशि मांगा। लेकिन जब आरटीआई कार्यकर्ता ने उक्त राशि मनीआर्डर से भेजा तो उन्होने स्पष्ट लेने से इंकार कर दिया। राशि को वापस कर दिया। जिसका शिकायत छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग में किया गया। सुनवाई में पंचायत सचिव ने राशि वापस करने से मुकर गया। झूठा बयान भी दिया। जिसमें शिकायतकर्ता ने जांच की मांग किया।

तात्कालीक मुख्य सूचना आयुक्त एम.के.राउत ने सच्चिदानंद आलोक सीईओ जिला पंचायत महासमुन्द को वस्तुस्थिति का परीक्षण प्रतिवेदन मांगा। सच्चिदानंद आलोक ने 02 अगस्त 2022 को सूचना आयोग में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिससे स्पष्ट लिखा है कि पंचायत सचिव रोहित पटेल ने आवेदक के द्वारा भेजा गया मनीआर्डर राशि को जमा नही किया। बल्कि वापस कर दिया है। इसलिए रोहित पटेल पूर्णतया दोषी है।

मामले की शिकायत शासन स्तर पर किया। जिस पर सच्चिदानंद ने विभागीय जांच का आदेश दिया। जांच में दिप्ती साहू उप संचालक पंचायत को सभी तथ्य मालूम होने के बाबजूद आरोपित सचिव को संरक्षण देते हुए प्रकरण नस्तीबद्व करने का नोटशीट फाइल सच्चिदानंद आलोक के समक्ष प्रस्तुत की है।

शिकायतकर्ता विनोद दास ने इस मामले की शिकायत मुख्य सचिव अमिताभ जैन आइएएस एवं निहारिका बारीक आइएएस प्रमुख सचिव को लिखित में किया। जिससे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 19 फरवरी 2025 को आयुक्त रायपुर संभाग रायपुर को जांच हेतु आदेशित किया। शासन के आदेश के परिपालन में आयुक्त ने कलेक्टर महासमुन्द को 05 मार्च 2025 को ग्राम पंचायत भोकलुडीह मामले में बिन्दूवार जांच कर विधिसम्मत कार्यवाही करने का आदेश दिया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सच्चिदानंद आलोक जब से महासमुन्द में पदस्थ हुए है तब से विभागीय जांच का हवाला देकर प्रकरण को लंबित रखकर आरोपित पंचायत सचिवो को संरक्षण देते है। जबकि शिकायत में पंचायत सचिवो को प्रथम दृष्टया प्रारंभिक जांच में दोषी पाये जाने पर निलंबित करके विभागीय जांच किया जाना है।



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