खैरागढ़ में प्रकृति के प्रति आभार: जंवारा कलश लेकर निकलीं महिलाएं, पिपरिया नदी में हुआ भोजली विसर्जन
खैरागढ़ : रक्षाबंधन के अगले दिन खैरागढ़ नगर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति और आस्था की अनूठी झलक देखने को मिली। प्रकृति के प्रति आभार और लोक परंपराओं के संरक्षण का संदेश देते हुए महिलाओं ने पारंपरिक भोजली यानी जंवारा यात्रा निकाली। बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर जंवारा कलश धारण कर यात्रा में शामिल हुईं।
यात्रा की शुरुआत किल्लापारा स्थित कुवांरी पाठ मंदिर से हुई। पारंपरिक गीतों और बाजे-गाजे के साथ निकली यात्रा इतवारी बाजार होते हुए धरमपुरा स्थित पिपरिया नदी पहुंची। इस दौरान नगर का माहौल उत्सवी और भक्तिमय नजर आया। नदी पहुंचने के बाद महिलाओं ने विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली का विसर्जन किया। यात्रा में बड़ी संख्या में नगरवासी भी शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में भोजली पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। रक्षाबंधन के अगले दिन जंवारा कलश लेकर महिलाएं नदी या तालाब तक जाती हैं और भोजली का विसर्जन कर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती हैं। खैरागढ़ में आयोजित इस पारंपरिक यात्रा में आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली।