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होम आइसोलेशन में जरा सी भी लापरवाही डाल सकती है आपको खतरे में.... सलाह लेना हो या जब हो दिक्कत तो तत्काल इस नम्बर पे सम्पर्क करें..जाने कैसे काम करते हैं कंट्रोल रूम टीम...

रायगढ़ कोविड-19 के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने कोविड केयर और कोविड अस्पतालों की व्यवस्था की है। इसके साथ ही मरीजों को होम आइसोलेट भी किया गया है। 24 घंटे होम आइसोलेटेड मरीजों के संपर्क में टीम है और वह उनकी सतत मॉनिटरिंग कर उनके स्वास्थ्य के प्रति और भी गंभीरता से काम कर रही है।

सीएमएचओ कार्यालय में बनाए गए दो टेलीफोनिक कंट्रोल रूम,मरीज की एक कॉल पर देते हैं परामर्श:-

होम आइसोलेशन वाले मरीजों की देखभाल के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में दो टेलीफोनिक कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। एक ट्रेसिंग और दूसरी डॉक्टर्स की। ट्रेसिंग वाली टीम हर दिन होम आइसोलेशन वाले मरीजों को फोन कर उनका हालचाल पूछती है साथ ही साथ उनके शरीर का तापमान, पल्स और ऑक्सीजन प्रतिशत के बारे में पूछती है। टीम मरीज से तसल्ली करती है कि उनकी तबीयत ठीक है या फिर नहीं। यह टीम तीन शिफ्टों में काम करती है सुबह 8:00 से दोपहर 2:00, दोपहर 2:00 से रात 8:00 और रात 8:00 से सुबह 8:00 बजे तक एक शिफ्ट में तकरीबन 10 लोग होते हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग से 10 टीचर्स की मदद मांगी है।

इसी तरह सीएमएचओ कार्यालय में डॉक्टर की कंट्रोल रूम बना हुआ है जो 24 घंटे सातों दिन सेवा में लगे हैं। प्रत्येक शिफ्ट में दो डॉक्टर्स की ड्यूटी है। होम आइसोलेशन में डॉक्टरों की ड्यूटी सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक 4802 वाले होम आइसोलशन के मरीजों में से 156 मरीजों ने सही समय पर इनसे संपर्क किया जिसके बाद उन्हें अस्पताल भेजा गया। इनमें से 51 की स्थिति गंभीर भी और उन्हें आपातकालीन सेवा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार होम आइसोलेशन के अब तक 3578 मरीज ठीक हो चुके हैं। इनमें से 156 मरीजों को इन्हीं लोगों ने फोन पर ही हॉस्पिटल शिफ्ट कराया। वर्तमान में 1001 मरीज होम आइसोलेशन में रह रहे हैं डॉक्टर्स हर फोन का बकायदा जवाब देते हैं और उचित परामर्श देते हैं।



अप्रिय स्थिति में भी आपा नहीं खोते कर्मचारी:-

टेलीफोन से मरीजों के ट्रेसिंग करने वाली टीम को कई बार अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। डिस्ट्रिक्ट पब्लिक हेल्थ नर्सिंग ऑफिसर सीमा बरेठ बताती हैं 85% मरीज का व्यवहार बहुत अच्छा रहता है लेकिन जो 15% मरीज होते हैं वह अपने स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में न बात करते हुए इधर-उधर की बातें करते हैं। जैसे कोई कोर्ट जाने की बात करता है तो कोई बदतमीजी से बात करता है। लेकिन हम उनकी मानसिक स्थिति को समझते हैं और अपना धैर्य बनाते हुए उनसे उनकी पल्स, ऑक्सीजन प्रतिशत, व तापमान बस यही पूछते हैं। कई सारे लोग अपना फोन बंद कर देते हैं या फिर फोन नहीं उठाते। ऐसी स्थिति में हम ग्राउंड स्टाफ को उस मरीज के घर जानकारी लेने के लिए भेजते हैं। होम आइसोलेशन के नोडल अधिकारी डॉक्टर राजेश मिश्रा बताते हैं कुल होम आइसोलेशन के मरीजों में से सिर्फ 5% ही मरीज ऐसे होते हैं जो जानकर परेशान करते हैं। रायगढ़ जिले में होम आइसोलेशन में रह रहे एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है अगर वह समय रहते होम आइसोलेशन के नियमों का पालन करते तो शायद बच सकते थे। मौत के बाद सिर्फ पछतावा ही होता है लोग पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर से अपनी रीडिंग लगातार लेते रहे और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति में सीधे 07762-232668 और 07762-22800 पर फोन करें।

कैसे काम करती है होम आसोलेशन की टीम

कोई व्यक्ति जब कोरोना पॉजिटिव होता है तो कंट्रोल रूम की टीम उसी दिन शाम तक मरीज को ट्रेस करने की कोशिश करती है और यथासंभव उसी दिन या फिर अगले दिन मरीज को मरीज के पास उसकी ट्रेसिंग टीम भेजती है। मरीज अगर होम आइसोलेशन चाहता है तो उसके पास रहने के लिए पर्याप्त जगह और बाथरूम है और वह असिमटमैटिक है, उसे बीपी शुगर जैसी बीमारी नहीं है तो टीम उसे होम आइसोलेशन के नियमों को समझाते हुए परमिशन देती है। इसके साथ ही उसे दवाई भी दिया जाता है।

कोविड हॉस्पिटल में सीजर ऑपरेशन से स्वस्थ बच्चे ने लिया जन्म:-

इस सब के बीच स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में कोविड-19 अस्पताल में एक स्वस्थ शिशु ने जन्म भी लिया है। डॉक्टर की टीम ने ऑपरेशन कर महिला की डिलिवरी कराई है। कोविड हॉस्पिटल में एक कोरोना संक्रमित महिला की ऑपरेशन से कराई गई डिलिवरी को चुनौतीपूर्ण दायित्व समझते हुए पूरी टीम ने अपनी संवेदनशीलता निभाते हुए अपना कर्तव्य निभाया है। इस कार्य के लिए डीए भीम सिंह ने सीएमएच डॉ. एसएन केसरी एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी है। यहां बता दें कोविड-19 हॉस्पिटल में मेडिकल टीम द्वारा 22 नार्मल डिलिवरी 12 सिजेरियन से स्वस्थ बच्चों की डिलिवरी कराई गई है। मेडिकल टीम से एन्स्थेटिक, पीडियाट्रीक एवं ग्यानकोलॉस्टि व नर्सों की टीम ने उम्दा कार्य किया है।

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