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मौत के आकड़े सरकारी सूची मे अलग, और शमशान घाट मे अलग, क्या हो रही है शवों की सौदेबाज़ी?

पूरे प्रदेश मे दिन ब दिन के बढ़ते आकड़े से आम जन मे काफी डर है, बल्कि लगातार बढ़ रहे संक्रमण को देखते हुए 5 मई तक लॉक डाउन को और बढ़ाने के निर्देश प्रदेश के कई जिलो के लिए निर्देशित भी कर दी गयी है गत कुछ हफ़्तो पहले दुर्ग के एक शमशान घाट से एक वीडियो वायरल हुई थी जिसमे दिखाया गया था की कैसे वहाँ शवों की भीड़ लगी थी जिन्हे चिता देने परिजनों की कतार थी, सिर्फ दुर्ग नही बल्कि रायपुर मे भी यही हाल था

प्रदेश के बाहरी राज्यो से कुछ लोगो की शिकायत रही की शवों को जलाने की भीड़ सरकारी आकड़ो से काफी अलग है, बर्रा के रमाशंकर यादव की पत्नी में कोरोना संक्रमण जैसे लक्षण थे। सांसें घटती जा रही थीं। चूंकि रिपोर्ट निगेटिव थी इसलिए उन्हें कहीं इलाज नहीं मिला। कोविड कमांड सेंटर से उन्हें मदद नहीं मिली। वे स्वयं प्रिया अस्पताल ले गए तो उन्हें वापस कर दिया गया। आखिरकार रमाशंकर की पत्नी की जान चली गई। रमाशंकर कहते हैं कि पत्नी को भर्ती कर उनका एक्सरे या सीटी स्कैन होता तो वे संक्रमित निकलतीं। जितने भी शव आ रहे हैं उनमें 70 फीसदी कोरोना संक्रमितों के होते हैं। मगर उनके शव कोविड-19 गाडइ लाइन का पालन करके नहीं भेजे जाते। बहुत से कोरोना संक्रमितों की मौत घरों में हो रही है।वे सीधे श्मशानघाट आ रहे हैं। इनकी मौत को सरकारी आंकड़ों में दर्ज करने का कोई विधान नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से रोज रात को जारी होेने वाली कोरोना मृतकों की संख्या हकीकत में सही नहीं होती।हैदराबाद की सरकारी आकड़ो को लेकर खबर मे चर्चा बनी रहीऐसे मे शवों की अदला बदली की भी बात सामने आई जिसे लेकर परिजनों ने हंगामा ही नही बल्कि अधिकारियों से शिकायत भी दर्ज करवाई, वही लोगो मे संक्रमण से ज्यादा अस्पताल जाने का डर है, हो भी क्यों ना, दो दिन पहले ही एक वीडियो और वायरल हुई थी जिसमे लगभग, 56 या 60 वर्षीय बुजुर्ग के शव के कवर को खोला गया तो उनके शरीर मे हलचल हो रही थी, फिर क्या पूरे होस्पिटल मे आक्रोश मे परिजन व अन्य लोगो ने तोडफोड़ की, बात आकड़े की करे तो इन सब भयावह स्थिति के चलते शवों की अदला बदली व गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए आम जन किनसे गुहार लगाए?

सरकारी आकड़ो मे चूक हो रही या शमशान घाट पर जलने वाली चिताए झुठ है?


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