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सूचना दस्तावेज देने में देरी, जनसूचना अधिकारी को 25000 रूपये जुर्माना।

बसना। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत समय सीमा में आवेदक को सूचना दस्तावेज नही देने पर जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत सलखण्ड को मुख्य सूचना आयुक्त ने 25,000 रूपये का जुर्माना कर एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु पंचायत विभाग को अनुशंसा किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने 24 दिसम्बर 2019 को स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) योजना के संबंध में सूचना दस्तावेज की मांग सचिव ग्राम पंचायत सलखण्ड जपं बसना से मांग किया। समय सीमा में सूचना दस्तावेज नही देने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बसना में 03 फरवरी 2020 को प्रथम अपील आवेदन प्रस्तुत किया गया। प्रथम अपील में 28 फरवरी 2020 को सचिव ग्राम पंचायत सलखण्ड को मुख्य कार्यपालन ने आदेश किया कि आवेदक को एक सप्ताह के भीतर निःशुल्क सूचना दस्तावेज प्रदाय करके पालन प्रतिवेदन कार्यालय में प्रस्तुत करे। लेकिन जनसूचना अधिकारी ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश का पालन नही किया। आवेदक को सूचना दस्तावेज नही दिया। आवेदक ने 08 जुलाई 2020 को छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील किया। सूचना आयोग से नोटिस प्राप्त होने के बाद जनसूचना अधिकारी ने 11 माह बाद आवेदक को सूचना दस्तावेज डाक से भेजा।

मुख्य सूचना आयुक्त एम. के. राउत ने 29 जून को द्वितीय अपील आदेश पारित किया। उन्होने पाया कि सचिव ग्राम पंचायत सलखण्ड के द्वारा जानबुझकर समय सीमा में आवेदक को सूचना दस्तावेज उपलब्ध नही कराया है। प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश का पालन नही किया है इसलिए दण्ड के भागी है। सचिव दीनदयाल चौहान को 25,000 रूपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया।

मुख्य सूचना आयुक्त ने इस प्रकरण में पुनः पाया कि प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश का सचिव ने पालन नही किया। सीईओ जनपद पंचायत बसना के स्मरण पत्रों का कोई जबाब नही दिया। ना पालन प्रतिवेदन कार्यालय में प्रस्तुत किया। जो सचिव की घोर लापरवाही है। इसलिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुन्द को सचिव दीनदयाल चौहान के विरूद्व जांच कर कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का अनुशंसा किया है।