सरकार की विफलता को दर्शाता बस्तर राज्य की मांग... युवा चाहते हैं कि बस्तर को अलग राज्य बनाया जाए
कांकेर जिले के माकड़ी के रहने वाले सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी योगेश नरेटी भी पृथक बस्तर राज्य के पक्षधर हैं। वे कहते हैं, "अभी तक यहां शिक्षा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। यहां इतनी खनिज संपदा है लेकिन बस्तरवासियों को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। जब हम लोग मांग करते हैं तब नक्सलियों का नाम लेकर हमारे आंदोलनों को दबाया जाता है। कोई भी सरकार इन समस्याओं को खत्म करने की पहल नहीं कर रही है। यहां तक कि सरकार बातचीत के लिए भी तैयार नहीं है।" वे आगे कहते हैं कि पेसा कानून के नियम तो अब तक नहीं बन पाए हैं ऐसे में उनके पास क्या चारा है? पृथक राज्य होगा तब बस्तर की समस्याएं सुलझेंगी।
कांकेर जिले के ही पलेवा में रहने वाले गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेता घनश्याम झुर्री का मानना है कि समस्याएं उनकी है तो समाधान भी उन्हें ही करना पड़ेगा। वे कहते हैं, "आजादी के 70 साल के बाद भी बस्तर की हालत बद से बदतर है। इतने सालों से बीजेपी और कांग्रेस की सत्ता रही है लेकिन यहाँ के मूलनिवासी समाज के साथ कभी न्याय नहीं हुआ है। इसे देखते हुए ये मांग की जा रही है।" झुर्री नक्सलवाद की समस्या का समाधान भी नए राज्य के गठन में देखते हैं।
हालांकि छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा इन मांगों के पीछे नक्सली साजिश की बात करते हैं। उनका कहना है कि बस्तर के गांव-गांव में नक्सलवाद है और अलग राज्य की मांग उसी साजिश का हिस्सा है। नक्सली ही इस तरह की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए वे कहते हैं कि प्रदेश सरकार इस बढ़ते नक्सलवाद को रोक पाने में नाकाम साबित हो रही है।
इस बार पृथक बस्तर की मांग को सिलगेर की घटना ने हवा दी है। सुकमा जिले के सिलगेर में जब सीआरपीएफ कैंप हटाने के लिए आंदोलन शुरू हुआ और 'गोलीकांड' के बाद ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ा, तब उसके बाद से आंदोलनकारियों के हाथों में अलग बस्तर की मांग वाले पोस्टर-बैनर देखे गए। एक ग्रामीण ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि इस क्षेत्र में अलग बस्तर की मांग जोर पकड़ रही है। उनके मुताबिक खासतौर पर युवा वर्ग में इस मांग को लेकर भारी समर्थन है। उन्होंने बताया, "सिलगेर में हुई घटना के बाद लोगों में बेहद गुस्सा है। अब युवा चाहते हैं कि बस्तर को अलग राज्य बनाया जाए। इस मांग के पीछे कोई संगठन या नेतृत्व नहीं है बल्कि युवाओं के बीच से ही ऐसी आवाजें आ रही हैं।"