साल 2010 के बाद पैदा हुए 'जेन अल्फा ' ....भारत की डिजिटल क्रांति ने बदला टीनएज फैशन...भविष्य के मार्केटिंग अल्फा मार्केटिंग पर बेस
'जेन जी' (साल 1995 के बाद पैदा हुए) और 'जेन अल्फा' (साल 2010 के बाद पैदा हुए) कहे जाने वाले ये नौजवान और टीनएज लड़के-लड़कियां हर लेटेस्ट ट्रेंड से वाकिफ हैं. वैसे इस 'कूल जनरेशन' का बेसिक फैशन सेंस कॉपी करना हो तो साइड स्वेप्ट या फेड हेयरस्टाइल रखिए, रेट्रो राउंड सनग्लासेज लगाइए फिर हुडी और रिप्ड एंकल लेंथ जींस के साथ स्पोर्ट्स शू या लोफर्स पहन लीजिए. बस, आप भी इनकी तरह कूल बन जाएंगे. फिर भी इनकी तरह कॉन्फिडेंट हो पाएं ये जरूरी नहीं है. तो कहां से आता है ये कॉन्फिडेंस? इस सवाल के जवाब में साइकोलॉजिस्ट हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, "कॉन्फिडेंस की वजह काफी हद तक टीनएज है क्योंकि इस दौरान खुद को जाहिर करने की इच्छा बहुत ज्यादा होती है. तब इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे क्या सोचते हैं. और हम सभी के अंदर किसी न किसी तरह की क्रिएटिविटी छिपी है लेकिन सबके पास अपना हुनर दिखाने के लिए बड़े स्टेज उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में इंस्टा रील्स और टिकटॉक जैसे माध्यमों ने इन्हें एक प्लेटफॉर्म दिया है. थोड़ा कॉन्फिडेंस इन माध्यमों ने भी बढ़ाया है."
साइकोलॉजिस्ट हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, "भारत में नेपोटिज्म और स्ट्रगल को लेकर कहानियां इतनी आम हैं कि लोग पूरे विश्वास के साथ एक्टर बनने की बात नहीं कह पाते. लेकिन दूसरों को अपना हुनर दिखाकर जरूर जानना चाहते हैं कि वे हमारे बारे में क्या सोचते हैं."
इन इंस्टा रील्स और वीडियोज में धार्मिक, जातीय और अस्मितावादी कंटेट भी होता है. 21 साल की उम्र से ही वीडियो बनाते आ रहे मध्यप्रदेश के बडवानी जिले के राजा कहते हैं, "मेरे वीडियो आदिवासी कल्चर के इर्द-गिर्द होते हैं. आदिवासी कल्चर के अलावा वीडियोज में 'प्यार-मोहब्बत' और 'हल्की-फुल्की छेड़छाड़' भी होती है." इसी तरह हिंदी महीने सावन में बनाए वीडियोज में प्रियांशी के माथे पर चंदन तिलक लगा रहता है.
इस पर हिमानी कहती
हैं, "जो बातें जेन जी और जेन अल्फा के बच्चे अपने वीडियोज में कर ले रहे
हैं वो मिलेनियल्स (साल 1980 के बाद पैदा हुए लोग) के लिए भी कहनी मुश्किल
थी. रिश्तों, जेंडर और भविष्य ही नहीं अस्मिता पर भी ये कंटेट क्रिएटर
स्पष्ट तौर पर अपनी सोच रख रहे हैं. इन रील्स में 'जिंदगी क्या है',
'दोस्ती क्या है', 'प्यार क्या है' जैसी बातें आम है. उनके पास भले ही शब्द
न हों लेकिन कविताओं, गीतों के जरिए वे अपनी सोच को सामने रख रहे हैं."
हालांकि हिमानी यह भी कहती हैं कि कंटेंट क्रिएटर 30-40 फीसदी ऐसा कंटेंट
अपने विचार और भावना के चलते बनाते हैं. ऐसे कंटेट बनाने के पीछे 60-70
फीसदी वजह इसका दर्शकों को पसंद आना होता है."
सिर्फ फैशन ही नहीं बल्कि आने वाली युवा पीढ़ी मतलब अल्फा जनरेशन के लिए ही मार्किट में तयारी की जा रही है..डिजिटल वर्ल्ड के साथ साथ ट्रेडिशनल मार्केटिंग में सबसे ज्यादा आने जो नीति अपनायी जा रही है उनमें 80% टारगेट अल्फा जनरेशन के लिए किया जा रहा है.जेनरेशन अल्फा, जेनरेशन वाई के बच्चे, और अक्सर जेनरेशन जेड के छोटे भाई-बहन। ऑस्ट्रेलिया में उनमें से ३ मिलियन हैं और २.५ मिलियन से अधिक हर हफ्ते विश्व स्तर पर पैदा होते हैं। जब वे सभी (२०२५) पैदा हो जाएंगे, तो उनकी संख्या लगभग २ अरब हो जाएगी- दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ी पीढ़ी।
जबकि वे सबसे युवा पीढ़ी हैं, उनके पास अपने वर्षों से परे ब्रांड प्रभाव और क्रय शक्ति है। वे सोशल मीडिया परिदृश्य को आकार देते हैं, लोकप्रिय संस्कृति प्रभावित करने वाले, उभरते हुए उपभोक्ता हैं और 2020 के अंत तक वयस्कता, कार्यबल और घरेलू गठन में आगे बढ़ रहे हैं, तैयार हैं या नहीं। जेन अल्फा अब तक की सबसे भौतिक रूप से संपन्न पीढ़ी है, अब तक की सबसे तकनीकी रूप से जानकार पीढ़ी है और वे किसी भी पिछली पीढ़ी के आस्ट्रेलियाई लोगों की तुलना में लंबे जीवन काल का आनंद लेंगे। वे लंबे समय तक शिक्षा में रहेंगे, अपनी कमाई वर्षों बाद शुरू करेंगे और इसलिए अपने माता-पिता के साथ अपने पूर्ववर्तियों, जेन जेड और जनरल वाई की तुलना में बाद में घर पर रहेंगे। इसलिए माता-पिता की भूमिका लंबी आयु सीमा तक फैलेगी- इनमें से कई जनरल अल्फाज के साथ उनके 20 के दशक के अंत तक घर पर रहने की संभावना है।
यह नवीनतम पीढ़ी एक अनजाने वैश्विक प्रयोग का हिस्सा है जहां सबसे कम उम्र से शांत करने वाले, मनोरंजन करने वाले और शैक्षिक सहायता के रूप में स्क्रीन उनके सामने रखी जाती हैं। यह महान स्क्रीन युग जिसमें हम सभी जी रहे हैं, उनके प्रारंभिक वर्षों के दौरान इस तरह की स्क्रीन संतृप्ति के संपर्क में आने वाली पीढ़ी पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। कम ध्यान देने से लेकर शिक्षा के सरलीकरण तक, बढ़ी हुई डिजिटल साक्षरता से लेकर बिगड़ा हुआ सामाजिक गठन तक, ये समय हम सभी को प्रभावित करता है, लेकिन अपने प्रारंभिक वर्षों में उन्हें बदल देता है। जनरेशन अल्फा का जन्म 2010 में हुआ था, जिस वर्ष iPad लॉन्च किया गया था, इंस्टाग्राम बनाया गया था, और ऐप वर्ष का शब्द था- और इसलिए अपने शुरुआती वर्षों से, वे स्क्रीनेजर रहे हैं।