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CG : वट सावित्री पूजा में उमड़ी महिलाओं की आस्था, पति की लंबी उम्र के लिए किया व्रत-पूजन

वट सावित्री का पर्व छत्तीसगढ़ समेत गरियाबंद जिले में श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही वट वृक्षों और मंदिर परिसरों में सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। गांधी मैदान स्थित फॉरेस्ट कॉलोनी और काली मंदिर परिसर में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में वट वृक्ष की पूजा की। महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया। कई स्थानों पर सामूहिक पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, बुद्धिमत्ता और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी मान्यता के चलते सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।

सनातन परंपरा में बरगद यानी वट वृक्ष को अमरत्व, दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। अब यह परंपरा केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं रही। छत्तीसगढ़ सहित कई क्षेत्रों में अविवाहित युवतियां भी अच्छे और संस्कारी जीवनसाथी की कामना के साथ वट सावित्री व्रत और पूजा में भाग ले रही हैं। धार्मिक जानकारों के अनुसार कुंवारी लड़कियां भी कथा श्रवण और पूजा-अर्चना कर सकती हैं।



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