
रायपुर संभाग में नेत्र सहायक अधिकारी के सीधी भर्ती के पदों पर नियम विरुद्ध पदोन्नति, रिक्त पदों में 20 प्रतिशत से अधिक पदों पर किया पदोन्नति
स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग, और संयुक्त संचालक के विरुद्ध निलंबन एवं कानूनी कार्यवाही की मांग।
स्वास्थ्य विभाग में संभागीय संयुक्त संचालक का बड़ा कारनामा सामने आया है जिसमें विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक एवं ड्रेसर को नेत्र सहायक अधिकारी के पदों पर मनचाही जगह पर प्रमोशन दिया जा रहा है। इसमें संयुक्त संचालक द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से पदोन्नति किया गया है, क्योंकि राजपत्र एवं भर्ती नियम 2020 अनुसार रिक्त पदों के केवल 20 प्रतिशत पदों को पदोन्नति एवं 80 प्रतिशत पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाने है। लेकिन 2021 से 2025 तक लगातार कर्मचारियों के नेत्र सहायक अधिकारी के पद पर मनचाही जगह पर किए जाने से स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ द्वारा सूचना के अधिकार से जानकारी ली गई जिसमें पूरे पदोन्नति के नाम पर मनमानी का पता चला। और पदोन्नति के आड़ में मनचाहा स्थान के लिए भ्रष्टाचार की भी पूरी संभावना है जिसकी जांच की मांग की गई है।
स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष टार्जन गुप्ता एवं प्रदेश सचिव प्रवीण ढीड़वंशी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष हरीश जायसवाल ने बताया कि संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर/दुर्ग द्वारा भर्ती नियम 2020 के विरुद्ध 20 प्रतिशत से अधिक पदों पर पदोन्नति करने के कारण, सीधी भर्ती के लिए रिक्त पदों का नुकसान हो रहा है, जिससे प्रदेश के प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं का नुकसान हो रहा है, जो कि प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ अन्याय है । साथ में विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों में होड़ लगी हुई है, स्वास्थ्य विभाग में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला , पुरुष, लैब टेक्नीशियन ,स्टाफ नर्स एवं अन्य पदों के अनेक पद रिक्त है जिन पर लंबे समय से भर्ती की मांग संघ द्वारा की जा रही है, जो कि शासन द्वारा लंबित है। विभागीय प्रशिक्षण में जाने एवं अवकाश स्वीकृति के लिए विभाग में भ्रष्टाचार की घटनाएं भी हुई है। विभागीय प्रशिक्षण में जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र कर्मचारी विहीन होते जा रहे है और स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है।
संघ के संभाग अध्यक्ष सुरेश पटेल और प्रदेश आई टी सेल प्रभारी संतलाल साहू ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को 2 साल का अवकाश दिया जाता है , इस अवधि में वो किस संस्था से प्रशिक्षण नियमित ले रहे है, या नहीं इसकी जांच नहीं होती, संस्था मान्यता प्राप्त है कि नहीं इसका भी कोई उल्लेख नहीं होगा है क्योंकि सभी कर्मचारी दूसरे राज्यों से प्रशिक्षण लेके आते है, उनके प्रमाण पत्रों की जांच और मान्यता का कोई ठोस आधार छत्तीसगढ़ के संस्थानों के आधार पर है या नहीं इसका कोई जांच नहीं होता है। पदोन्नति प्राप्त कई कर्मचारी ऐसे भी है जिनका प्रशिक्षण पूरा नहीं हो पाया था , प्रमाण पत्रों का पंजीयन नहीं हो पाया था, और पदोन्नति सूची हेतु वरीयता सूची में कार्यालय द्वारा जारी कर दिया गया था।
संयुक्त संचालक द्वारा पदोन्नति की इतनी जल्दबाजी की कर्मचारीयो की पैरामेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र के प्राप्त होने से पहले ही वरीयता सूची जारी कर दी जाती थी। ऐसे में भ्रष्टाचार की पूरी संभावना है जिसकी जांच आवश्यक है।
रिक्त पदों में से 20 प्रतिशत से अधिक पदों पर मनमानी नियुक्ति एवं राजपत्र के भर्ती नियम को ताक में रखते हुए नियम विरुद्ध पदोन्नति करने वाले संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं संभाग रायपुर/दुर्ग को निलंबित कर कानूनी कार्यवाही एवं जांच की मांग की गई है। इसके लिए स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ द्वारा माननीय स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, एवं आयुक्त संभाग रायपुर को ज्ञापन सौंपा गया है।