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चावल उत्पादन में भारत बना नंबर-1, चीन को छोड़ा पीछे

भारत ने चावल उत्पादन के क्षेत्र में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी।

भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पंहुचा

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन रहा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उच्च पैदावार वाले बीजों के विकास और कृषि अनुसंधान में निरंतर प्रगति का परिणाम है। चौहान ने कहा कि भारत अब वैश्विक बाजार में एक प्रमुख चावल निर्यातक देश के रूप में भी उभर चुका है।

25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों को किया लॉन्च

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों को लॉन्च किया। इन 184 किस्मों में 122 अनाज, 6 दालें, 13 तिलहन, 11 चारा फसलें, 6 गन्ना, 24 कपास और जूट एवं तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल हैं।

कृषि मंत्री ने नई किस्मों को किसानों तक शीघ्र पहुंचाने दिए निर्देश

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन नई किस्मों को किसानों तक शीघ्र पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि उन्नत किस्मों से किसानों को अधिक पैदावार और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त होगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। चौहान ने कृषि वैज्ञानिकों से दालों और तिलहनों के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, ताकि देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

11 वर्षों में 3,236 उच्च उपज वाली किस्मों को दी गई मंजूरी 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले 11 वर्षों में 3,236 उच्च उपज वाली किस्मों को मंजूरी दी गई है, जबकि 1969 से 2014 के बीच केवल 3,969 किस्मों को ही स्वीकृति मिली थी। नई जारी की गई किस्मों को जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की लवणता, सूखा और अन्य जैविक एवं अजैविक चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।


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