CG : अंजन हिल कोल माइन्स के लिए 5 फरवरी को होगा लोक सुनवाई, निजी भूमि का नहीं होगा अधिग्रहण
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के चिरमिरी क्षेत्र अंतर्गत प्रस्तावित अंजन हिल ओपन कास्ट कोल माइन्स परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2006 के तहत 05 फरवरी 2026 को लोक सुनवाई आयोजित की जाएगी। इस संबंध में एसईसीएल द्वारा जारी पत्र के अनुसार यह स्पष्ट किया गया है कि परियोजना के लिए किसी भी निजी भूमि स्वामी की भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित नहीं है। लोक सुनवाई का उद्देश्य अंजन हिल कोयला खनन परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों, संभावित लाभों तथा सुरक्षा उपायों की जानकारी आमजन को देना एवं जन-सुझाव आमंत्रित करना है। परियोजना के 0 से 5 किलोमीटर परिधि में भुभुकी, मुकुंदपुर, आमाडांड, कदरेवा, मेरो एवं दुबछोला की छह ग्राम पंचायतें स्थित हैं।
परियोजना का कुल क्षेत्रफल 388.261 हेक्टेयर है। इसमें खदान क्षेत्र के अंतर्गत 211.54 हेक्टेयर वन भूमि सम्मिलित है, जिसके लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। पहुंच मार्ग हेतु 8.721 हेक्टेयर वन भूमि प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त चिरमिरी ओसीएम की डी-कोल्ड भूमि पर ओबी डंप एवं अन्य परिचालन क्षेत्र के अंतर्गत 19.905 हेक्टेयर निजी भूमि, 10.45 हेक्टेयर शासकीय भूमि तथा 137.645 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है, जिसका कुल क्षेत्रफल 168 हेक्टेयर है और जिस पर भौतिक कब्जा पहले से उपलब्ध है।
कुल मिलाकर परियोजना में 19.905 हेक्टेयर निजी भूमि, 10.45 हेक्टेयर शासकीय भूमि एवं 357.906 हेक्टेयर वन भूमि सम्मिलित है और किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित नहीं है। परियोजना के लिए कोई पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन गतिविधि प्रस्तावित नहीं की गई है। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत आयोजित ग्राम सभाओं के अनुसार परियोजना क्षेत्र में न तो कोई पट्टा जारी हुआ है और न ही किसी प्रकार का अतिक्रमण पाया गया है।
परियोजना से किसी नाले, सड़क या अन्य सार्वजनिक अवसंरचना का व्यपवर्तन नहीं होगा। खदान के लिए समर्पित सड़क विकसित की जा रही है जिससे ग्राम एवं सार्वजनिक सड़कों पर अतिरिक्त यातायात भार नहीं पड़ेगा और मानव बस्तियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा। खनन कार्य शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन प्रणाली पर आधारित होगा जिससे जल प्रदूषण की संभावना नगण्य रहेगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए खदान के जीवनकाल में चरणबद्ध तरीके से 10 लाख से अधिक पौधों का रोपण, हरित पट्टी विकास, एवेन्यू प्लांटेशन एवं खदान समापन कार्य किए जाएंगे तथा खदान बंद होने के पश्चात पांच वर्षों तक उनका रखरखाव किया जाएगा।
वन भूमि के विचलन के बदले 439.406 हेक्टेयर अवनत वन भूमि पर क्षतिपूरक वनीकरण प्रस्तावित किया गया है।
परियोजना से लगभग 580 प्रत्यक्ष एवं करीब 2000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त सामुदायिक विकास कार्यों पर 399.37 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे तथा कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत आसपास के क्षेत्रों में सीएसआर गतिविधियां संचालित की जाएंगी। रॉयल्टी, डीएमएफ, एनएमईटी, जीएसटी एवं अन्य करों के माध्यम से शासन के राजस्व में वृद्धि होगी जिससे क्षेत्र में शिक्षा, सड़क, पेयजल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार संभव होगा।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अंजन हिल ओपन कास्ट कोल माइनिंग के माध्यम से खनन कार्य नहीं किया गया तो पूर्व में संचालित भूमिगत खदान में लगी आग के सतह तक पहुंचने की आशंका बनी रहेगी, जिससे वन क्षेत्र, पर्यावरण एवं राष्ट्रीय संपत्ति को गंभीर क्षति हो सकती है।