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छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग ने बनयान कंपनी को किया 3 करोड़ 11 लाख रुपये का भुगतान, विज्ञापन के नाम पर फर्जीवाड़ा बना चर्चा का विषय, क्या शासन की लुटिया डुबोने में लगा है विभाग ?

छत्तीसगढ़ शासन ने जिस विभाग को अपने प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी दी है, वह विभाग शासन की लुटिया डुबोने में लगा है. हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की जिसकी चर्चा इस समय विज्ञापन के नाम पर फर्जीवाड़ा करने को लेकर बनी हुई है.

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग ने प्रचार प्रसार के नाम पर ऐसे वेबसाइट, youtube चैनल को विज्ञापन दिया हैं, जिनका की वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं है. जनसंपर्क विभाग के इन कारनामों को लेकर जब मंत्रियों से सवाल पूछे जा रहे हैं तो मंत्री इस सवाल से भागते नजर आ रहे हैं, मतलब छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग का कारनामा आज मंत्रियों को आम लोगों के बीच से भागने पर मजबूर कर दिया है.

दरअसल छत्तीसगढ़ के आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने 6 दिन पूर्व अपने सोशल मीडिया अकाउंट में आरटीआई के माध्यम से जनसंपर्क विभाग से मिली एक जानकारी सार्वजनिक कर दी, यह वह जानकारी है जिसे विभाग पारदर्शिता के नाम पर पिछले कुछ वर्षों से छुपता आ रहा है.

जब यह जानकारी सार्वजनिक हुई तो बवाल मचना लाजमी था, विभाग ने बनयान इन्फोमीडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को करीब 1 साल 5 महीनो में 3 करोड़ 11 लाख रुपये का भुगतान कर दिया जिसके youtube पर सिर्फ 532 सब्सक्राईबर थे. इसके बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री जब एक कार्यक्रम में थे तो एक पत्रकार ने सावल किया की छत्तीसगढ़ शासन ने विज्ञापन के नाम पर बनयान कंपनी को 3 करोड़ 11 लाख रुपये का भुगतान किया है तो इस सवाल पर उपमुख्यमंत्री जाने लगे और आपने गाडी में बैठकर जानकारी लेकर बताऊंगा कहकर वहां से निकल पड़े.

वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव से ज़ीरो टोलरेंस की बात करते हैं लेकिन लेकिन उनके खुद के विभाग में हो रहे करोड़े के भ्रष्टाचार पर उनका कोई लगाम नहीं है, जब मुख्यमंत्री के पास अपने रखे विभाग में इतना भ्रष्टाचार है तो अन्य विभाग का क्या हाल होगा यह सोच से परे है.

इतना ही नही जनसंपर्क विभाग ने 1 साल में ऐसे 67 न्यूज़ चैनल को एक साल में 18 करोड़ 57 लाख का भुगतान कर दिया जिन न्यूज़ चैनलों के बारें में आधे से ज्यादा लोग जानते ही नहीं है.

जबकि छत्तीसगढ़ में कई ऐसे youtube चैनल, वेबसाईट है जो सभी मापदंड रखने के बाद भी विज्ञापन पाने के पात्र नहीं हो पाते हैं, अगर किसी तरह इन्हें विज्ञापन मिल भी जाता है तो उसकी राशि महज 8500 रुपये की होती है.

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ संपर्क विभाग द्वारा आखरी बार अगस्त 2024 में वेबसाईट इम्पैनलमेंट की सूचि जारी की गई थी, जिसमें कई पात्र वेबसाईट को अपात्र तथा अपात्र वेबसाईट को पात्र बना दिया गया था. विभाग द्वारा cgsandesh.com को भी पात्र होने के बावजूद अपात्र बता दिया गया था, जिसपर आपत्ति जताई गई तो विभाग द्वारा 10,000 प्रतिमाह के विज्ञापन की राशि जारी कर दी गई.

लेकिन इस विज्ञापन के बदले छत्तीसगढ़ संपर्क विभाग द्वारा सभी वेबपोर्टल को आये दिन नए नए और अधिक कार्य दिए जाने लगे ताकि पात्र वेवसाईट स्वयं को असक्षम मानकर इम्पैनलमेंट सूचि से हट जाए.

इसके बाद हमने देखा की कई ऐसी वेबसाईट है जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है बावजूद इसके उन्हें जरुरत से ज्यादा राशि दी जा रही है, जिसकी शिकायत जनसंपर्क विभाग के आयुक्त रवि मित्तल से मैच 2025 में की गई तो भी उनके द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई, कुछ अधिकारीयों ने बताया कि ऊपर के कुछ अधिकारी से मिलकर कमीशन देने से आपका काम हो जायेगा. हलाकि हमें शिकायत प्रक्रिया पर जाँच का पूर्ण विश्वास था जिसके बाद हमने कमीशन वाली बात को नजर अंदाज कर दिया.

इधर करीब तीन माह बाद भी शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं होने से हमने जनसंपर्क विभाग का विज्ञापन प्रदर्शन करने से बंद कर दिया और इसकी जानकारी जनसंपर्क आयुक्त की दी, बावजूद इसके इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा, और विभाग द्वारा पात्रता रखने के बावजूद cgsandesh.com को विज्ञापन देना बंद कर दिया. क्योकि शायद छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार का बोलबाला है.

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग द्वारा किये जा रहे इस भ्रष्टाचार की शिकायत हमने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय तथा छत्तीसगढ़ जनशिकायत में की, लेकिन जाँच की जिम्मेदारी जनसंपर्क विभाग को ही दे दी गई. मतलब जिस विभाग से हमने 6 माह तक जाँच की उम्मीद लगाई, वापस उसी विभाग को जाँच की जिम्मेदारी दे दी गई.

वैसे तो भारत सरकार ने इस बजट में कंटेट क्रियेटर के लिए नौकरी और लैब की बात कही है, लेकिन अब ये सब एक तरह का ढकोसला लगने लगा है, छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की भ्रष्टाचार विज्ञापन नीतियों के चलते हम विगत 9 वर्षों से चल रहे cgsandesh.com  को अब बंद करने के बारे में सोच रहे हैं. जिसका हमें दुःख है और पाठकों से मिले लगातार विश्वास के प्रति हम आभारी हैं.



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