केंद्रीय बजट 2026–27 | उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
ललित बेरिवाला, मैनेजिंग डायरेक्टर – श्याम स्टील ग्रुप
हम 1 फरवरी 2026 को माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार 9वीं बार प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट 2026–27 का हार्दिक स्वागत करते हैं। यह बजट 2047 तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के विज़न को साकार करने की दिशा में एक अधिक सशक्त, तकनीकी रूप से सक्षम और समावेशी भारत की मजबूत नींव रखता है।
पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर देते हुए इसे 9 प्रतिशत तक बढ़ाना (वर्ष 2026–27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को 12.2 ट्रिलियन रुपये तक ले जाना), रेलवे नेटवर्क का विस्तार, एक्सप्रेस हाईवे कनेक्टिविटी और निर्माण-आधारित विकास भारत के बुनियादी ढांचे को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगा तथा गुणवत्तापूर्ण स्टील की निरंतर मांग को बढ़ावा देगा। टियर-II और टियर-III शहरों में बुनियादी ढांचा विकास के प्रस्ताव से स्टील, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री क्षेत्रों को गति मिलेगी, साथ ही शहरी एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होकर बेरोजगारी पर अंकुश लगेगा।
जलमार्ग विकास क्षेत्र पर विशेष बल, सात नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा, पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत यात्री कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर कॉरिडोर, केमिकल पार्क, रेयर अर्थ कॉरिडोर और टेक्सटाइल पार्क की घोषणाएं, साथ ही दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार, देश की आर्थिक वृद्धि को नई दिशा देंगे।
तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के इस दौर में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों और स्किल-टू-एम्प्लॉयमेंट फ्रेमवर्क पर सरकार का फोकस आधुनिक विनिर्माण उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप है। इससे स्टील उद्योग को स्मार्ट प्रक्रियाओं, बेहतर उत्पादकता और तकनीक के माध्यम से परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार का लाभ मिलेगा।
बजट का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और महिला सशक्तिकरण पहलों को निरंतर समर्थन देना है, जो उद्यमिता को बढ़ावा देता है और समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, यह बजट बुनियादी ढांचे की गति को मजबूती देता है, तकनीकी फोकस को तेज करता है और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करता है—जो भारत के औद्योगिक और सामाजिक प्रगति के अगले चरण के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार करता है।
पिछले वर्षों की तरह यह बजट भी विकासोन्मुख, प्रगतिशील, व्यवसाय-अनुकूल और व्यावहारिक है।