गांव में राशनकार्ड चाहिए तो चुकाना पड़ रहा है टैक्स ! मृतक के नाम से भी जारी हुई रशीद.
राशनकार्ड कार्ड के बहाने पंचायतें बीपीएल कार्डधारियों से कर वसूली के खेल में जुट गई हैं, गरीबों को नए राशन कार्ड देने के बदले पंचायत सरपंच सचिव संपत्ति की बकाया राशि ले रहे हैं. जबकि ये नियम विरुद्ध है. पंचायतों में कर वसूली के लिए राजस्व शिविर लगाया जाता है, लेकिन सचिव इन शिविरों में जाते ही नहीं, कागजों पर सारी कार्रवाई गढ़ देते हैं. और अब वे गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों से कर की वसूली ऐसे समय कर रहे हैं, जब उन्हें राशन के लिए कार्ड की जरूरत है. इस काम में पंचायत सचिव ही नहीं, सरपंच भी शामिल हैं.
कल पिथौरा ब्लाक अंतर्गत एक विचित्र बात सामने आया आनन-फानन में या जान बुझ कर एक मृत व्यक्ति के नाम से कर वसूली का रसीद जारी किया गया. गांव के एक व्यक्ति ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम पंचायत तरेकेला आश्रीत ग्राम खैरझुड़ी विकासखंड पिथौरा के सचिव चतुर्वेदी के द्वारा मकान टेक्स रसीद काटा गया जबकी मृतक को 8 /10 वर्ष हो गया है.
सबसे पहले सरायपाली ब्लॉक के ग्राम पंचायत जंगलबेड़ा में सम्पति कर के नाम पर 200 रु. प्रति कार्ड लिया जा रहा था, जिसके बाद गाँव के लोगो ने SDM और जनपद सीईओ से इसकी शिकायत कर इस टैक्स को बंद करवाया.
वही 2 दिन पहले सरायपाली ब्लॉक के ग्राम पंचायत प्रेतनडीह में भी कार्ड बाँटाते समय रसीद देकर 200 रुपये लिया जा था. हालांकि पंचायत एक्ट में प्रावधान है कि प्रति वर्ष के अनुसार से शहरों औऱ ग्रामीण क्षेत्रो में बकाया कर वसूल किया जाता है. यह नियम ग्रामीण और शहरों के लिए अलग-अलग है लेकिन ठीक राशनकार्ड वितरण के समय 200 रु लेने से एवं सही नियम का जानकारी नही होने के कारणों से ग्रामीणों में निराशा है, वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि राशनकार्ड के लिए 200 रुपये लिया जा रहा है.
इस सम्बंध में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव ने कहा कि खाद्य विभाग द्वारा राशनकार्ड वितरण के लिए जनपद पंचायत और नगर निकायों को जिम्मेदारी दी गई है, हितग्राहियों को शिविर लगाकर नि:शुल्क रासनकार्ड का वितरण किया जाना है.
अगर राशन कार्ड वितरण के समय कार्ड के नाम से किसी अन्य मद का रकम वसूली किया जा रहा है तो यह गलत है, सम्बंधित विभाग को अवगत कराया जाएगा.