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कृषि मंत्री ​जितेंद्र सिंह तोमर ने कहा- किसानों से आधी रात को भी बात करने को हूं तैयार

केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में भले ही कृषि बिल (Farm Bills) को पास करा लिया हो लेकिन किसानों (Farmers) का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है। केंद्र सरकार ने किसानों के विरोध प्रदर्शन पर विपक्ष पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि कुछ लोग किसानों के बीच बिल को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर (Jitender Singh Tomar) ने एक बार फिर जोर देते हुए कहा है कि वह बिल के प्रावधानों पर किसी भी किसान से आधी रात को भी बात करने को तैयार हैं।

गौरतलब है कि कृषि बिल को भले ही संसद की दोनों सदन में पास करा लिया गया है लेकिन इसे लेकर पंजाब और हरियाणा के किसान अब सड़क पर उतर आए हैं। कृषि बिल के विरोध में आ​ज पंजाब और हरियाणा के किसानों ने बंद का ऐलान किया है। पंजाब बंद के लिए 31 किसान संगठनों ने हाथ मिलाया है। जबकि हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन समेत कई संगठनों ने हड़ताल के समर्थन की बात कही है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार लगातार कृषि बिल को किसानों के पक्ष में होने की बात कह रही है।

गुरुवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी सरकार की किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कृषि बिल के जरिए उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

किसानों से बातचीत के लिए हमेशा हूं तैयार

जितेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि बिल पर वह किसानों से कभी भी, किसी भी समय बात करने के लिए हमेशा तैयार हैं। अगर कोई किसान सरकार के किसी भी प्रतिनिधि से आधी रात को भी बात करना चाहेगा तो हम उनसे बात करने को पूरी तरह से तैयार हैं। इस मौके पर उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि साल 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस ने जो कहा था मोदी सरकार ने वही किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने ही घोषणा पत्र में किए वादे का विरोध कर रही है तो उसके दोहरे चेहरे को दिखाता है।

अनिश्चितकालीन रेल रोको प्रदर्शन भी शुरू करने का फैसला

किसान संगठनों ने एक अक्टूबर से अनिश्चितकालीन रेल रोको प्रदर्शन भी शुरू करने का फैसला किया है। प्रदर्शनकारियों ने आशंका व्यक्त की है कि केंद्र के कृषि सुधारों से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा। किसानों ने कहा है कि तीनों विधेयक वापस लिए जाने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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