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नई - पुरानी बारदाना नीति समाप्त करें व शराब के टैक्स से बारदाना सप्लाई करे सरकार -अरुण पाण्डेय

ख़रीदी केंद्रों पर रखें फ़सल असमय बारिश से ख़राब ना हो, प्रशासन इसकी पूर्व व्यवस्था करे

अरुण पाण्डेय् ने कहा -व्यवस्था दुरुस्त रहे किसान ना हो परेशान, अन्यथा की स्तिथि में विरोध होगा

छत्तीसगढ़ / बस्तर । अरुण पाण्डेय् ने छत्तीसगढ़ सरकार से यह मांग किया है कि किसानों के हित में काम करें और धान, मक्का खरीदी के लिए बारदाना की नई पुरानी नीतियों को समाप्त करे।
उन्होंने वर्तमान वर्ष में सरकार द्वारा 70% और किसानों द्वारा 30% बारदाना नियम का विरोध करते हुए इस नियम को रद्द करने की मांग भी की है। सरकार किसानों को 100% बारदाना की व्यवस्था कराए क्योंकि यह उनका कर्तव्य है।

गौरतलब होकि लगभग प्रतिवर्ष किसानों के द्वारा समर्थन मूल्य में धान - मक्का खरीदी के समय ही ख़रीदी केंद्रों में बारदाना की भारी कमी होती है और नई - पुरानी बारदाना के पेचीदा नियम के कारण धान व मक्का का संग्रहण होने लगता है जिससे जाम लग जाती है। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्रों में बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों की फसलों की खरीदी बंद हो जाती है, जिससे किसानों की धान - मक्का जस का तस रह जाता है और खरीदी का समय गुज़र जाता है। जिसके चलते किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर नहीं बेंच पाते हैं।

इस तरह जब किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य में बेच नहीं पाते हैं तब वे खुले बाजार में फ़सल विक्रय करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जिस कारण राज्य एवं देश के किसान महाजन कर्ज, बैंक लोन व समिति लोन चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं।


अरुण पाण्डेय् ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया हैकि प्रदेश में चलाए जा रहे नए - पुराने बारदाना नीति में परिवर्तन किया जाए, साथ ही पूर्व वर्षों में धान खरीदी केंद्रों पर प्रभारी द्वारा किसानों के लिए बारदाना की क्षतिपूर्ति राशि ₹60 प्रति बारदाना किसानों को जल्द से जल्द भुगतान किया जावे। जब तक किसानों की पूरी धान व मक्का समर्थन मूल्य में किसान बिक्री नहीं कर लेते तब तक धान खरीदी चालू रखें।

● नई - पुरानी बारदाना नीति समाप्त करें व शराब के टैक्स से बारदाना सप्लाई करे सरकार
नई - पुराने बारदाना नीति अनुसार 30% बारदाना की व्यवस्था इस वक़्त किसानों द्वारा किया जाना संभव नहीं है क्योंकि बारदाने का बाजार मूल्य छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार द्वारा दिए जाने वाले मूल्य ₹18 से अधिक है जिसका सामान्य बाज़ार में मूल्य ₹60 तक है व यही क़ीमत सरकार द्वारा किसानों को भी अदा करना चाहिए। धान खरीदी का पैमाना वर्तमान परिस्थिति में संभव नहीं है, विगत दिनों पूर्व राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में हुए अकस्मात असमय बारिश की वजह से फसलों को नुकसान हुआ है। वर्तमान में भी राज्य में बारिश होने का अनुमान मौसम विज्ञानी जता चुके हैं, ऐसे में ख़रीदी केंद्रों में खुले आसमान के नीचे पड़े किसानों के फ़सल ख़राब हो सकते हैं । राज्य शासन किसानों की हितैषी सरकार है उनके हर सुख दुख में साथ देने की बात करती है तो किसानों के फ़सल की दाने दाने की पूरा खरीदी उन्हें करनी चाहिए। धान में नमी की वजह से किसानों के धान को खरीदने में शासन द्वारा किसी प्रकार का प्रपंच ना करते हुए धान के दाने दाने की खरीदी किया जाना चाहिए। किसानों को बेवजह उन्हें प्रताड़ित करने विभिन्न नियम नही थोपना चाहिए। उन्होंने सरकार से कहा कि शराब में टैक्स वसूल किया जा रहा है उस पैसों से राज्य के किसानों के लिए बारदाना की खरीदी करनी चाहिए। इसके बावजूद भी यदि पैसों की आवश्यकता हो तब शराब में टैक्स दोगुनी कर दी जाए परंतु किसानों को पैसे नही होने का रोना रोकर परेशान ना करें सरकार।



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