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आफताब के ‘दृश्यम’ पर भारी पड़ा पुलिस का ‘सम्मोहन’, हत्यारे से ऐसे उगलवाए कत्ल के सारे राज

श्रद्धा हत्याकांड में पुलिस ने कातिल आफताब के रचे-रचाए खेल से पर्दा उठा दिया है। अपनी लिव-इन-पार्टनर श्रद्धा वालकर की हत्या कर उसके शव के 35 टुकड़े करने के बाद आफताब ने पुलिस को मनगढ़ंत कहानी सुनाकर उनका ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस से बचने के लिए वह अपना बयान लगातार बदलता जा रहा था। लेकिन उसको यह नहीं पता था कि रील लाइफ और रियल लाइफ में बहुत अंतर होता है। आफताब दृष्यम फिल्म से काफी प्रभावित था और उसे लगता था कि वह विजय की तरह ही पुलिस को मूर्ख बनाकर निकल जाएगा। हांलाकि आफताब को पता था कि आफताब को पुलिस एक दिन जरूर गिरफ्तार कर लेगी इसलिए पुलिस से बचने के लिए उसने एक कहानी रची थी जिसे सुनाकर वह पुलिस को कई दिनों तक उलझाए रखा।



आफताब ने ऐसे खोले हत्या के राज के परत दर परत

सबसे पहले आफताब ने पुलिस को बताया कि श्रद्धा 22 मई को उसे छोड़कर चली गई थी। लेकिन जब पुलिस ने टेक्निकल एविडेंस दिखाकर आफताब को बताया कि वो झूठ बोल रहा है। तब उसने बताया कि कैसे उसने गुस्से में श्रद्धा का मर्डर कर दिया। जिसके बाद उसने अपनी और श्रद्धा की एक ऐसी प्रेम कहानी सुनाई जिसमे उसने खुदको बेचारा और बेबस साबित करने की कोशिश की।

पुलिस ने आफताब को अपने भरोसे में लिया

शुरुआत में पुलिस को पता था कि छह महीने पुराने इस केस में खुद से सबूत जुटाना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित होगी, लिहाजा पुलिस ने आफताब की दृश्यम वाली कहानी को तोड़ने के लिए सम्मोहन का सहारा लेने का फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने आफताब के सीने में दफन राज को उगलवाने के लिए उसे पूरी तरह अपने वश में करने का फैसला किया और यह जिम्मेदारी इस केस के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राम सिंह को सौंपी गई। राम सिंह ने गिरफ्तारी के बाद से ही आफताब का पूरा ख्याल रखना शुरू कर दिया, बिना आफताब पर कोई सख्ती किए आफताब जो भी खाने को मांगता उसे दिया जाने लगा।

आफताब को पुलिस ने केस से बचाने का दिया लालच

अपने ऊपर पुलिस का भरोसा होता देख आफताब जांच अधिकारी को सारी बातें खुलकर बताने लगा। पुलिस ने आफताब को भरोसा दिलाया कि वो उसको इस केस में बचा सकती है बशर्ते वह बता दे कि उसने श्रद्धा के लाश के टुकड़ों को कहां फेंका है। अब आफताब पूरी तरह पुलिस के सम्मोहन में जकड़ चुका था और उसे जांच अधिकारी पर पूरा भरोसा हो गया था। लिहाजा वह पुलिस को हर उस जगह पर लेकर गया जहां उसने लाश के टुकड़ो को ठिकाने लगाया था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर अलग-अलग जगहों से 18 से ज्यादा हड्डियां बरामद की और उन्हें CFSL जांच के लिए भेज दिया गया। आफताब ने पुलिस को बताया कि उसने लाश काटने में इस्तेमाल आरी गुरुग्राम के जंगलों में फेंकी थी लेकिन ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद अभी तक वह हथियार नहीं मिला है।

पॉलीग्राफी और नार्को टेस्ट के लिए आफताब की हामी भरवाना भी था उसी सम्मोहन का हिस्सा

सूत्रों के मुताबिक जब पुलिस ने आफताब का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट करवाने का फैसला किया तब उनके सामने टेस्ट के लिए आफताब को राजी करने की सबसे बड़ी चुनौती थी। लिहाजा यहां पर भी जांच अधिकारी पर आफताब का अटूट भरोसा काम आया और उसने जांच अधिकारी के कहने पर पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट करवाने के लिए हामी भर दी। आफताब अगर चाहता तो वो कोर्ट के सामने पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट करवाने से मना भी कर सकता था, जिसके बाद पुलिस चाहकर भी उसका पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट नहीं करवा सकती थी। लेकिन आफताब खुद नहीं जानता था कि जिस पुलिस को वो दृश्यम की तर्ज पर अपनी कहानी सुना कर गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। पुलिस उससे एक कदम आगे चलकर उसको अपनी सम्मोहन की ट्रिक से पूरी तरह काबू कर चुकी थी।

अब तिहाड़ के जेल नंबर 4 का कैदी है आफताब

पुलिस ने आफताब का पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने के बाद उसका नार्को टेस्ट करवाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल आफताब को 14 दिन की रिमांड खत्म होने के बाद 13 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ के जेल नंबर चार में भेज दिया है।





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