CG : मां की ममता, बच्चे की रक्षा के लिए बाघ से भीड़ गई मादा ... - CG Sandesh

CG : मां की ममता, बच्चे की रक्षा के लिए बाघ से भीड़ गई मादा भालू, पीठ के पीछे छूपा रहा बच्चा. सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है वीडियो.

नारायणपुर : एक मां अपने बच्चे को एक खरोंच भी नहीं आने देती. बच्चे के लिए वो हर खतरा मोल लेने के लिए तैयार रहती है. मां की ममता का कोई मोल नहीं होता. ऐसा ही एक मां का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक मादा भालू अपने बच्चे को बचाने के लिए बाघ से भीड़ गई. दरअसल रविवार सुबह अबूझमाड़ के पांगुड़ गांव से एक वीडियो सामने आया जो सोशल मीडिया में काफी वायरल हो रहा है. वीडियो में एक मादा भालू अपने बच्चे को बाघ से बचाने के लिए संघर्ष करती दिख रही है. मादा भालू ने अपने बच्चे को पीठ पर रख बाघ से संघर्ष किया और बाघ को सड़क से दूर खदेड़ दिया.

दावा किया जा रहा है कि, यह वीडियो गांव के ही कुछ लोगों ने तब बनाया जब वे सड़क के करीब से गुजर रहे थे. वीडियो सामने आने के बाद इसकी जांच वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है. विभाग कह रहा है कि, वीडियो के आधार पर हम गांव वालों को वन्य जीवों की रक्षा के लिए जागरूक करेंगे.

बताया जा रहा है कि, जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर घने जंगलों से घिरे पांगुड़ गांव में कुछ दिन पहले एक नई सड़क का निर्माण किया गया. यहां एक मादा भालू अपने शावक के साथ सड़क पार कर रहा था. तभी एक बाघ से वहां आ पहुंचा.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाघ ने जैसे ही मादा भालू और उसके बच्चे की ओर रुख किया, वैसे ही मादा भालू ने बिना डरे बाघ से टक्कर लेना शुरू कर दिया. यह संघर्ष कुछ पलों तक चला, जिसमें मादा भालू के शावक अपनी मां से लिपटे नजर आता रहा. मादा भालू के साहस से टाइगर भाग खड़ा हुआ. यह पहली बार है जब इस क्षेत्र से बाघ और भालू की लड़ाई का वीडियो सामने आया है. लेकिन इस वीडियो से ये साफ है कि, मां अपने बच्चे पर आए हर खतरें को अपने ऊपर ले लेती है. और अपने बच्चे को बचाने के लिए वो कुछ भी कर सकती है.


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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