बसना : फोर व्हील ड्राइव ट्रैक्टर की ओर बढ़ता किसान, सुरक्षित होंगी गांवों की प्रधान मंत्री डामर सड़कें
असमय सड़क क्षति रुकने से सरकार को होगी करोड़ों रुपये की बचत , आम जनता को भी मिलेगी राहत
सी. डी. बघेल। बसना : बसना–सरायपाली अंचल, जिसे फुलझर क्षेत्र की कृषि क्रांति की धरती कहा जाता है, एक बार फिर खेती के क्षेत्र में बड़े बदलाव का साक्षी बन रहा है। इस क्षेत्र में जहां सबसे अधिक बोरवेल, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, मोटरसाइकिल एवं कृषि आदान सामग्री की दुकानें देखने को मिलती हैं, वहीं अब किसानों के बीच फोर व्हील ड्राइव ट्रैक्टर को लेकर तेजी से बढ़ता आकर्षण एक नई दिशा की ओर इंगित कर रहा है। अब तक क्षेत्र में खेती के लिए प्रचलित ट्रैक्टरों में पहले सिंगल केजव्हील का उपयोग होता था। बरसात एवं रबी फसल सीजन में बेहतर जोताई , खेतों की मताई और अधिक उत्पादन की चाह में किसानों ने अपने ट्रैक्टरों में डबल केजव्हील लगाना प्रारंभ किया। देखते ही देखते क्षेत्र के लगभग 95 प्रतिशत ट्रैक्टरों में डबल केजव्हील का उपयोग होने लगा। इससे किसानों को खेत की मिट्टी पलटने और जुताई मताई में अवश्य लाभ हुआ, लेकिन इसका दुष्प्रभाव गांव-गांव में बनी करोड़ों रुपए की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की डामर सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा।
डबल केजव्हील के कारण सड़क की सतह से सीधा संपर्क होने से डामर सड़कें वजनी ट्रेक्टर लोहे के पहिए से तेजी से उखड़ने लगीं। सड़कें समय से पहले खराब होने लगीं, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के पुनर्निर्माण का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा। हालांकि अनेक समस्याओं से हमेशा घिरा किसान की पीड़ा के चलते तथा किसानों की मजबूरी और खेती की आवश्यकता को देखते हुए प्रशासन भी सख्त कार्रवाई से प्रायः परहेज करता रहा, लेकिन आमजन और स्वयं किसानों के मन में भी यह अपराधबोध बना रहा कि डबल केजव्हील ट्रैक्टर से खेती के कारण गांव की सड़कें खराब हो रही हैं। डबल केजव्हील ट्रैक्टर को खेत तक ले जाने एक अतिरिक्त ट्रेक्टर से सड़क पर चलाने से पहले ट्रैक्टर पर चढ़ाना-उतारना, डबल केजव्हील के ऊपर चौड़ा गोल पट्टा लगाना, एक अतिरिक्त ट्रैक्टर की आवश्यकता और अधिक समय लगने जैसी समस्याओं के चलते यह प्रक्रिया भी अत्यंत बोझिल थी। इसके बावजूद विकल्प न होने से किसान मजबूर थे।
अब फोर व्हील ड्राइव ट्रैक्टर बना समाधान
बीते दो-तीन वर्षों में इस समस्या का व्यावहारिक समाधान बनकर सामने आया है फोर व्हील ड्राइव ट्रैक्टर। इस ट्रैक्टर में पहले की तरह केवल सिंगल केजव्हील का उपयोग होता है, जो चक्का के साथ लगा सड़क की सतह से लगभग 6 इंच ऊपर रहता है। इससे डामर सड़क से सीधा संपर्क नहीं होता और सड़क को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचता। विशेषज्ञों और किसानों के अनुसार, सामान्य टू-व्हील ड्राइव ट्रैक्टर की तुलना में फोर व्हील ड्राइव ट्रैक्टर से करीब 30 प्रतिशत अधिक कार्यक्षमता प्राप्त होती है। इससे खेतों की जोताई मताई के समय ईंधन, समय और श्रम की बचत के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
छांदनपुर से शुरू हुई नई कृषि क्रांति की शुरुआत
फोर व्हील ड्राइव ट्रैक्टर की इस नई शुरुआत का श्रेय बसना विकासखंड के ग्राम छांदनपुर को जाता है। यही वह गांव है जहां 1990 के दशक में सबसे पहले बोरवेल खनन कर गर्मी माह में डबल फसल प्रणाली की नींव पड़ी थी। इस गांव में 1990 के बाद देखते देखते लगभग अधिकांश खेतों में बोर खनन होता गया। और रबी में भी बरसात की तरह हर खेत में धान की खेती होती गई। बरसात के बजाय गर्मी माह की धान फसल डबल होने से किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिला जिससे यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती चली गई। इसके बाद पूरे क्षेत्र में बोर खनन कर रबी फसल और कृषि समृद्धि का विस्तार हुआ। आज पूरे बसना क्षेत्र में बरसात की तरह गर्मी माह में भी धान की फसल ली जाती है। लगभग 80 प्रतिशत खेतों में बोर से खेती हो रहा है। हार्वेस्टर मशीन से धान कटाई की क्रांतिकारी शुरुआत भी छांदनपुर से हुई थी। और देखते ही देखते मजदूरों से धान कटवाने के बजाय पूरे क्षेत्र में हार्वेस्टर मशीन से धान कटाई प्रारंभ हो गया। अब 98 प्रतिशत धान कटाई हार्वेस्टर से हो रहा है।
आज वही छांदनपुर एक बार फिर कृषि नवाचार का केंद्र बन गया है। गांव में पहले जहां 50–60 ट्रैक्टर से डबल केजव्हील लगा कर किसान खेती कर रहे थे, वहीं अब करीब 40 ट्रैक्टर फोर व्हीलर में परिवर्तित हो चुके हैं। इससे गांव की सड़कें सुरक्षित हैं और खेती भी अधिक प्रभावी हो रही है। एक किसान ने बताया कि उसके पास 32 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वह सिंगल केजव्हील से खेती करता था, बाद में मजबूरी में डबल केजव्हील अपनाना पड़ा। अब फोर व्हीलड्राइव ट्रैक्टर से उसे वही लाभ मिल रहा है, वह भी बिना सड़क नुकसान के। छांदनपुर से शुरू हुई इस फोरव्हील ड्राइव ट्रैक्टर के बदलाव अब बसना क्षेत्र के लगभग सभी गांव में देखने को मिल रहा है। हर गांव में 4 से 5 नए फोरव्हील ड्राइव ट्रैक्टर हो चुके हैं। इस तरह क्षेत्र के सभी गांवों के अनेक किसान फोरव्हील ड्राइव ट्रैक्टर खरीदते जा रहे हैं जिससे आने वाले समय में यह बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और गांव की प्रधानमंत्री सड़क काफी सुरक्षित होगी जिससे आम जनता को सड़क में चलना भी आसान होगा और सरकार को भी इसका करोड़ों रुपए का लाभ मिलेगा।
लागत अधिक, लेकिन लाभ दीर्घकालिक
हालांकि सेम पावर की सामान्य ट्रैक्टर की तुलना में फोरव्हील ड्राइव ट्रैक्टर खरीदने में दो से तीन लाख रुपये अतिरिक्त खर्च आता है, जो हर किसान के लिए आसान नहीं है। बावजूद इसके, पुराने ट्रैक्टर को बदलकर नए ट्रैक्टर लेने की आसान प्रक्रिया और दीर्घकालिक लाभ को देखते हुए किसान तेजी से इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।
किसान, सरकार और आमजन—तीनों को लाभ
फोरव्हील ड्राइव ट्रैक्टर के बढ़ते उपयोग से जहां किसानों की खेती अधिक लाभकारी होगी, वहीं डामर सड़कों की आयु बढ़ेगी, असमय सड़क मरम्मत रुकेगी और शासन को करोड़ों रुपये की बचत होगी। आने वाले वर्षों में यदि यह परिवर्तन व्यापक रूप लेता है, तो यह क्षेत्र एक बार फिर राज्य के लिए मॉडल कृषि विकास क्षेत्र के रूप में उभर सकता है। स्पष्ट है कि फोर व्हील ड्राइव ट्रैक्टर न केवल खेती की उत्पादकता बढ़ा रहा है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रहा है—जो किसान और सरकार, दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी सिद्ध हो रहा है।