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जम्मू कश्मीर में मारा गया हिजबुल का कमांडर, पुलिस ने कहा-डोडा जिला हुआ आतंक मुक्त

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के अनंतनाग स्थित खुलचोहर इलाके में सुरक्षाबलों ने आज (सोमवार) तड़के तीन आतंकियों (Terrorist) को मार गिराया. इस मुठभेड़ में हिजबुल का कमांडर मसूद अहमद भट्ट मारा गया है. जम्मू कश्मीर पुलिस ने इसे बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि अब डोडा जिला आतंक मुक्त हो गया है.बता दें कि सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. हिजबुल कमांडर के अलाा दो और आतंकी इस मुठभेड़ में ढेर हुए हैं. सुरक्षाबलों का ऑपरेशन अभी भी जारी है. मारे गए आतंकियों के पास से एक एके-47 और 2 पिस्टल बरामद की गई हैं. उनकी पहचान नहीं हो पाई है. संयुक्त टीम पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह किस आतंकी संगठन से जुड़े थे.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंक के खात्मे के लिए ऑपरेशन चलाया हुआ है. इस महीने CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने एक दर्जन से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया है. शोपियां, अवंतीपोरा समेत कई इलाकों में यह ऑपरेशन जारी है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस बीते शुक्रवार दावा किया था कि पुलवामा जिले के त्राल क्षेत्र में हिजबुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen) के आतंकियों की अब कोई मौजूदगी नहीं है. 1989 में घाटी में आतंकवाद के फैलने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि त्राल आतंकमुक्त हुआ है. दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में त्राल के चेवा उलार इलाके में सुरक्षा बलों के साथ रात भर हुई मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों के मारे जाने के बाद पुलिस ने यह दावा किया था.

इस बारे में बताते हुए कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) विजय कुमार ने कश्मीर क्षेत्र पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट में कहा, 'आज के सफल अभियान के बाद त्राल क्षेत्र में अब हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों की मौजूदगी नहीं है. यह 1989 के बाद पहली बार हुआ है.'

भारत में मानव तस्करी को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र समूह सीधे तौर पर सरकार विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए 14 वर्ष तक के कम उम्र किशोरों की लगातार भर्ती और उनका इस्तेमाल करते रहे हैं.

विदेश मंत्रालय की ''2020 ट्रैफिकिंग इन पर्सन'' रिपोर्ट अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बीते बृहस्पतिवार को जारी की थी. इसमें बताया गया है कि माओवादी समूहों ने हथियार और आईईडी को संभालने के लिए खासकर छत्तीसगढ़ और झारखंड में 12 वर्ष तक के कमउम्र बच्चों को जबरन भर्ती किया और कभी-कभी मानव ढाल के तौर पर भी इनका इस्तेमाल किया गया.

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