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घटिया सामग्री लगाकर भ्रष्टाचारियों ने मेरे बेटे को मारा,,,, बुढ़ापे में उठवा दी जवान बेटे की अर्थी'

मुरादनगर श्मशान घाट हादसे में बेटे की मौत के बाद मुकेश का परिवार शोकाकुल है। बुजुर्ग पिता ने रोते हुए कहा कि वह आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे।

अपनी तिजोरी भरने के लिए मेरा घर क्यों सूना कर दिया। मेरा बेटा बीएससी करने के बाद पुलिस अफसर बनना चाहता था। रोज कहता, पापा देख लेना एक दिन आपको दुनिया का हर सुख दूंगा।' मुकेश सोनी 60 साल के हैं। श्मशान घाट हादसे में उनके 22 साल के बेटे की मौत हुई है। बेटे के बिस्तर से लिपटकर मुकेश फफक पड़े। भीगी आंखों ने गला भर दिया। बोले, 'कौन सा पाप हुआ जो बुढ़ापे में जवान बेटे की अर्थी उठवा दी।' घर में मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। मुकेश फिर बोले, 'अब आखिरी सांस तक न्याय की लड़ाई लड़ूंगा स्टेशन रोड के पास दयानंद कॉलोनी में मुकेश सोनी रहते हैं। साधारण परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। दिग्विजय ने बीएससी की थी। दिल्ली पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। ट्यूशन आदि के जरिए उसी की थोड़ी बहुत आय से घर चल रहा था। आस-पड़ोस के लोगों ने कहा कि बेटी को ही सरकारी नौकरी मिल जाती तो घर चल जाता। मुकेश ने कहा, लिंटर गिरना हादसा नहीं है। मेरे बेटे की हत्या की गई है। घटिया सामग्री लगाकर भ्रष्टाचारियों ने मेरे बेटे को मारा है। कोर्ट में आखिरी सांस तक न्याय की मिन्नत करूंगा। दोषियों को सजा होगी, तभी मेरे बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।

सुबकते हुए मुकेश बोले, 'सबकी लाशें श्मशान जाती हैं, लेकिन मुझ अभागे के बेटे की लाश वहां से घर आई थी।' हादसे के 10 दिन बीत चुके हैं। लेकिन, अब तक किसी के आंसू नहीं सूखे हैं। चूल्हा जलता जरूर है, लेकिन किसी का पेट नहीं भर रहा। मां बेटे को याद कर बेहोश हो जाती है। महज 1 साल छोटी बहन प्रियंका है। 11 साल का एक भाई मयंक सोनी है। मम्मी-पापा की हालत ने इन्हें वक्त से पहले बड़ा कर दिया।

दोनों कभी मां को संभालते तो कभी पापा के गले लगकर ढांढस बंधाते। लेकिन, अकेले में इनके आंसू किसी सैलाब से कम नहीं होते। दिग्विजय की मां निधि काफी संभलने के बाद सुबकते हुए बोलीं- कैसे मान लूं कि मेरा बच्चा नहीं आएगा। मुझसे बोलकर गया था कि 15 मिनट में लौट आऊंगा। फिर प्रियंका को आवाज देतीं, देख बिटिया, भैया आ गया क्या?

प्रियंका ने बताया कि भैया के पास सुबह करीब 11 बजे उनके एक दोस्त का फोन आया था। उसी ने पड़ोस में रहने वाले अंकल की मौत की सूचना दी थी। घर में बोलकर भैया गया था, 15 मिनट में लौट आऊंगा। सबने मना किया था। मैंने भी कहा, बारिश हो रही। मौसम खराब है, मत जाओ। लेकिन, भैया नहीं माना। भैया घायल हो गया था। ऐम्बुलेंस में उसे आईटीएस अस्पताल ले जाया गया था। पापा भी वहां पहुंचे, तब तक उसकी मौत की सूचना दी गई।






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