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प्रदेश में फिर गर्माने लगा सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति का मुद्दा

प्रदेश में सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति का मुद्दा फिर गर्माने लगा है। प्रदेश में 1 लाख 09 हजार सहायक शिक्षकों की मांग को उठाने और सरकार तक उनकी मांगों को सटीकता के साथ पहुँचाने वाली छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन ने फिर आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। राज्य शासन द्वारा सहायक शिक्षकों के मांग के सन्दर्भ में अभी तक कोई निर्णय नहीं लेने के कारण एक बार फिर शिक्षा मंत्री सहित प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारीयों से चर्चा करने का प्रयास कर रही है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन द्वारा राजधानी रायपुर में 12 मार्च को जोरदार धरना प्रदर्शन करने बाद देर शाम शिक्षामंत्री से चर्चा हुई थी। शिक्षा मंत्री ने वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों को ध्यान से सुनने के बाद सहायक शिक्षक फेडरेशन के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया था की आप लोगो की मांग जायज है ,और माह अप्रैल में वेतन विसंगति / क्रमोन्नति की मांग पूर्ण करने की बात कही थी। 12 मार्च को प्रदेश के कई हजार सहायक शिक्षकों के द्वारा राजधानी रायपुर में जोरदार जंगी प्रदर्शन करने के बाद और शासन प्रशासन से हुई चर्चा के बाद जिस प्रकार से माहौल बन रहे थे उससे सहायक शिक्षकों की मांग अप्रैल माह में पूर्ण हो जाएगी ऐसी उम्मीद बनी थी। लेकिन इसी बीच एक बार फिर कोरोना महामारी का दूसरा लहर आ गया और और शासन से पुनः दोबारा चर्चा नहीं हो पाया। सहायक शिक्षकों के मांगों के तरफ से सरकार द्वारा कोई निर्णय नहीं लेने के कारण एकबार फिर शिक्षक संगठन शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर चर्चा करने का प्रयास कर रही है। 

प्रदेश में वैसे तो शिक्षकों की कई संगठन है। और सभी शिक्षक संगठन सहायक शिक्षकों के मांग को प्रमुखता से उठाने का दावा करते है। लेकिन इन संगठनों पर हमेशा सहायक शिक्षकों का फायदा उठाने का आरोप लगते आ रहा है। यही कारण है की लगातार सहायक शिक्षकों के मांग की उपेक्षा होने के कारण सहायक शिक्षकों के आवाज और उनकी हक़ लड़ाई को सरकार तक सही तरीके से पहुँचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन संगठन का गठन किया गया है। यह संगठन प्रदेश का सबसे बड़ा संगठन है जिसमे लगभग एक लाख सहायक शिक्षक इस संगठन से जुड़े हुए है। सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति सहित क्रमोन्नति का लाभ नहीं मिलने के कारण प्रतिमाह 10 से 12 हजार रूपये का प्रतिमाह नुकसान हो रहा है। सहायक शिक्षक 22 - 23 सालों से एक ही पद पर कार्यरत है, सभी योग्यता एवं अर्हता होने बावजूद सरकार उन्हें क्रमोन्नति , पदोन्नति से वंचित रखा है। व्याख्याता एवं शिक्षक के वेतन में मात्र 1000 - 2000 का अंतर है वही सहायक शिक्षक एवं शिक्षक के वेतन में 10 हजार का अंतर है। यही अंतर को वेतन विसंगति कहा जाता है। यह विसंगति सन 2013 से अब तक जारी है।