बसना : WHO के नाम पर ग्राम पंचायतों में महिला समन्वयक व सहायक की भर्ती करने वाला गिरोह एक बार फिर सक्रिय !
फरवरी माह में मुंगेली जिला में बेबी फूड प्रोजेक्ट के लिए साईं ट्रस्ट उड़ीसा संस्था की ओर से गांव-गांव मे कुपोषित बच्चों के सर्वे के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में महिला समन्वयक व सहायक महिला समन्वयक की भर्ती के लिए आवेदन लिए जा रहे थे. जिनके द्वारा किसी तरह का दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर कार्यालय को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक सील कर दिया गया।
साईं ट्रस्ट उड़ीसा की संस्था द्वारा मुंगेली जिले में पंचायत स्तर पर दो कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी कर प्रत्येक पंचायत में दो महिला कर्मचारी की नियुक्ति हेतु 1500 रूपए लिए जाने का मामला सामने आया था. और प्रदेश के बेमेतरा जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया था.
ठीक इसी तरह बसना में भी इस ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक पंचायत में दो महिला कर्मचारी की नियुक्ति हेतु 1500 रूपए लिए जाने का मामला सामने आया है. इस ट्रस्ट के द्वारा बसना में 1500 रूपए लेकर कुछ महिलाओं को करीब 2 माह से भी ज्यादा सर्वे का काम करवाकर इन्हें पैसा नहीं दिया गया. इन महिलाओं को नियुक्ति पत्र तथा आईडी कार्ड भी दिया गया था.
बताया जाता है कि बसना में सिटी ग्राउंड के पास इस ट्रस्ट का कार्यालय खोला गया था, जहाँ कुपोषित बच्चों के सर्वे के लिए भर्ती के नाम पर कई लोगों से पैसा लिया गया है. लेकिन कार्यालय में रहने वाले लोग इस समय फिर से फरार बताये जा रहे हैं.
जानकारी के अनुसार फरवरी में मुंगेली जिला में इसके कार्यालय को सील करने के बाद, बसना कार्यालय के लोग भी फरार हो गए थे. जो अभी होली के पूर्व सक्रीय हो गए हैं. एक बार फिर व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से महिलाओं को जोड़कर उनसे आईडी कार्ड के नाम पर 250 रुपये की मांग की जा रही है.
जबकि इनके प्रदेश के मुख्य कार्यालय रायपुर, और ओडिशा में फ़ोन पर किसी तरह का संपर्क नहीं हो पा रहा है. हो सकता है फिर से यह गिरोह नौकरी के नाम पर क्षेत्र में ठगी के इरादे से सक्रिय हो रहा है.
कल जब छत्तीसगढ़ सन्देश ने इनसे वापस बसना में कार्यालय खोले जाने के सम्बन्ध में फ़ोन पर पूछने का प्रयास किया तो इनके द्वारा फ़ोन काट दिया गया. इसके बाद ट्रस्ट के लोगों ने व्हाट्सएप्प ग्रुप के मध्यम से महिलाओं को 21 मार्च तक कार्यालय बंद होने की बात कही है. और वापस बसना कार्यालय बंद किया जा चूका है.
आपको बता दें कि इसके पूर्व में भी बसना जनपद अंतर्गत एक एनजीओ द्वरा गाँव में नंबर प्लेट लगाने के नाम पर छल करते हुए 40 रुपये लेने की बात सामने आ चुकी है. महासमुंद जिले में करोड़ों के इस फर्जी आहरण में अधिकारीयों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है. लोगों को इस बात का पता नहीं चल पाता कि आखिर ग्रामीणों से 40 रूपये किसने लिए और यह राशि कहाँ जमा हुई.