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बसना : महाभारतकालीन परम्परा के अनुरूप गण्डेश्वर प्रधान की वैदिक अन्त्येष्टि क्षेत्र में ऐतिहासिक उदाहरण

9 को वैली वैश्य देवी यज्ञ, 10 को पंचकुण्डीय विश्व शांति यज्ञ व श्रद्धाञ्जलि सभा का आयोजन

बाबा रामदेव 10 जनवरी को वर्चुअल माध्यम से देंगे श्रद्धाञ्जलि

सी. डी. बघेल; बसना : बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम पलसापाली निवासी धर्मनिष्ठ, वैदिक संस्कृति के संवाहक एवं उच्च आदर्शों के प्रतीक स्वर्गीय श्री गण्डेश्वर प्रधान की अन्त्येष्टि वैदिक ग्रंथों में वर्णित महाभारतकालीन परम्परा के अनुरूप मंत्रोच्चार एवं विधि–विधान से सम्पन्न कर क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया गया। विद्वानों के अनुसार इस प्रकार की शास्त्रोक्त अन्त्येष्टि क्षेत्र में पहली बार सम्पन्न हुई है, जो आने वाले समय में इतिहास के पन्नों में दर्ज रहेगी।

पौष शुक्ल द्वादशी तदनुसार 31 दिसंबर 2025 को स्वर्गीय गण्डेश्वर प्रधान का देहावसान हुआ था। वैदिक संस्कार पद्धति के अनुसार सम्पन्न अन्त्येष्टि में मृत शरीर के वजन के बराबर 70 किलोग्राम शुद्ध घी एवं सुगन्धित चंदन लकड़ी व अन्य सुगंधित सामग्री मिलाकर कुल 105 किलोग्राम द्रव्यों से तथा अलग से पर्याप्त सुखी लकड़ी से अन्त्येष्टि संस्कार सम्पन्न हुआ। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया उसी प्रकार की गई, जैसी प्राचीन काल में महाभारत युग तक प्रचलित थी।

संस्कार के दौरान ओड़िशा एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न आठ गुरुकुलों से पधारे आचार्यगण, ब्रह्मचारी एवं ब्रह्मचारिणी वृन्द की उपस्थिति ने वातावरण को वैदिक चेतना से अनुप्राणित कर दिया। स्वर्गीय गण्डेश्वर प्रधान सरकारी सेवा में रहते हुए भी आजीवन धर्म, योग, अध्यात्म, सेवा एवं भारतीय परम्पराओं के प्रचार-प्रसार में संलग्न रहे। वे अपनी सन्तान एवं पौत्र–पौत्रियों को वैदिक संस्कृति एवं ऋषि परम्परा से जुड़कर जीवन जीने की सतत प्रेरणा देते रहे। उनके संस्कारों का ही परिणाम है कि उनका परिवार आज भी गुरुकुल परम्परा एवं आर्य समाज के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उनके ज्येष्ठ पुत्र श्री ताराकान्त प्रधान छत्तीसगढ़ प्रान्तीय आर्य प्रतिनिधि सभा के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में आर्य समाज के कार्यों को गति प्रदान कर रहे हैं। 

वहीं कनिष्ठ पुत्र दिलीप कुमार जिज्ञासु आजीवन नैष्ठिक ब्रह्मचर्य की दीक्षा लेकर वर्तमान में गुरुकुल हरिपुर (ओड़िशा) में आचार्य पद पर रहते हुए संस्कारवान एवं राष्ट्रप्रेमी ब्रह्मचारियों के निर्माण में योगदान दे रहे हैं। स्वर्गीय प्रधान के पोता ब्रह्मचारी वेदभानु प्रधान पतंजलि योगपीठ द्वारा संचालित पतंजलि गुरुकुलम् (बालक वर्ग) में अध्ययनरत हैं, जबकि अन्य पोता–पोती भी देश के विभिन्न राज्यों में स्थित गुरुकुलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उनकी पुण्य स्मृति में 31 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल शांति पाठ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी हो रहे हैं।

परिजनों के अनुसार 9 जनवरी 2026 को ग्राम पलसापाली में वैली वैश्य देवी यज्ञ आयोजित किया जाएगा, जिसे आसपास के कन्या गुरुकुलों के आचार्यगण एवं ब्रह्मचारियों द्वारा विधिवत सम्पन्न किया जाएगा। वहीं 10 जनवरी 2026 को प्रातः सुबह 8 बजे से 8:45 बजे तक पंचकुण्डीय वैदिक विश्व शांति यज्ञ आयोजित होगा। इसके पश्चात 8:45 बजे से दोपहर 12 बजे तक श्रद्धाञ्जलि सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्वर्गीय गण्डेश्वर प्रधान को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे। श्रद्धाञ्जलि सभा में देश के विभिन्न स्थानों से पधारे साधु-संत, विद्वान आचार्य एवं महानुभाव स्वर्गीय प्रधान के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं वैदिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त करेंगे।

इसी क्रम में 11:30 बजे से 12:00 बजे के मध्य योगगुरु परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज हरिद्वार से गूगल मीट के माध्यम से वर्चुअल रूप से सभा से जुड़कर स्वर्गीय गण्डेश्वर प्रधान को श्रद्धाञ्जलि अर्पित करेंगे तथा उपस्थित शोकाकुल परिवार एवं जनसमुदाय को अपने प्रेरक उद्बोधन से संबोधित करेंगे। बाबा रामदेव जी की वर्चुअल उपस्थिति से यह श्रद्धाञ्जलि सभा आध्यात्मिक दृष्टि से और भी गरिमामयी बनेगी। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं वैदिक अनुयायियों की व्यापक सहभागिता होगी ।


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