सोना खनन हेतु सर्वे की अनुमति देने से आदिवासियों में भारी आक... - CG Sandesh

सोना खनन हेतु सर्वे की अनुमति देने से आदिवासियों में भारी आक्रोश, लगाये वेदांता कंपनी वापस जाओ के नारे.

बलौदाबाज़ार/कसडोल  आदिवासी दलित मंच के तत्वधान में सोनाखान में शहीद वीरनारायण सिंह की कर्मभूमि जहाँ से शहीद वीरनारायण सिंह ने आजादी के लिए अंग्रेजो से लोहा लिया उस भूमि को विदेशी कंपनी को सोना खनन हेतु सर्वे की अनुमति देने से इस क्षेत्र के आदिवासियों में भारी आक्रोश है.जिसे लेकर लाल जोहार, जय भीम के साथियों के नारों से सभा का आयोजन सोनाखान में वीरनारायण सिंह के शहीद स्मारक में किया गया.

जिसमें 18 टोला के 22 ग्राम के मुखिया साथियो द्वारा बताया गया कि 20 नवम्बर को वेदांता कंपनी और सरकार के परिंदे द्वारा बाघमाड़ा में सोनाखनन हेतु विजिट किया गया. जिसमें एक ओर कंपनी कहती कह रही है सोनाखान क्षेत्र से 6 किलोमीटर की दूरी पर बाघमाड़ा स्थित है, जहाँ पर इस खनन क्षेत्र से सोनाखान वीरनारायण सिंह के क्षेत्र से कोई लेना देना नही है जो  कि गलत है.

उन्होंने बताया कि 18 टोला में ये सब क्षेत्र आता है. एक तो बाघमाड़ा राजदेवरी पंचायत का आश्रित ग्राम है. कुछ माह पूर्व सरकार बनते ही ग्रामीणों ने माननीय भूपेश बघेल से मुलाकात सोनाखनन हेतु बात रखा गया था कि सोनाखनन हेतु परमिशन न दिया जाय, तो ग्रामीणों की बात रखते हुए आश्वत कराया गया था कि हम आदिवासियों के साथ है, और हमारी सरकार के रहते हुए नही होने देंगे। फिर क्या मजबूरी है कि खनन हेतु सर्वे के लिए स्वीकृत देना पड़ा ?

इनका कहना है हम अपनी जंगल जमीन के लिए कुछ भी करने को तैयार है. समय आने पर हम आदिवसियों को वीरनारायण सिंह के नक्शे कदम पर चलने मजबूर न करे सरकार. अतिशीघ्र इस सर्वे और वेदांता या अन्य किसी कंपनी को वीर भूमि को न दे ।

उन्होंने कहा कि इस भूमि और जंगल से हमारा पुराना नाता है,  आजादी की लड़ाई और आजादी से पहले हम यहां पर निवासरत है,  हम अपनी जंगल जमीन नही छोड़ेंगे चाहे सरकार कुछ भी कर ले. भूपेश सरकार आदिवासीयों के साथ अन्याय कर रही है.




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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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