नेताओं की कमीशनखोरी से बढ़ा भ्रष्टाचार
इस 26 जनवरी को देश 77वें गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन देश से भ्रष्टाचार समाप्त होने की बजाय लगातार अपने पैर पसार रहा है. महंगाई और बेरोजगारी से आम जनता त्रस्त है, एक छोटे से काम के लिए आज आम आदमी को कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते है. घूसखोरों की बजाय अब कमीशनखोरी का जमाना आ चूका है. कमीशनखोरी का आलम यह है कि अब कई जगहों पर बिना 30% के कोई काम नहीं होता है. जब नेता ही विकास के नाम पर कमीशनखोरी करने लगेंगे तो अधिकारीयों को भ्रष्टाचार करने से कौन रोक सकता है.
सांसद और विधायक निधि से शुरू हुई ये कमीशनखोरी अब नेताओं के हर काम पर दिखने लगी है, सड़क हो, पुल हो, पानी की टंकी हो या कोई अन्य प्रोजेक्ट हर काम से अब नेता अपना अलग से हिस्सा और कमीशन मांगने लगे हैं. बिना कमीशन के ठेकेदार, पंचायत या किसी विभाग को अब काम मिलना मुश्किल हो गया है. नेताओं की कमीशनखोरी के चर्चा की गूंज अब गाँव गलियों में सुनाई देती है. आज कई लोगों के जुबान में यह बात रहती है कि बिना कमीशन के कोई काम नहीं मिलता है.
अब विकास के नाम पर आधे से ज्यादा कार्य कमीशन खाने की लालसा में किये जा रहे हैं, जिन नेताओं को आम जनता विकास के लिए चुनती है वो चुने जाने के बाद कमीशनखोरी में जुट जाते हैं, जिसके चलते देश में घटिया, गुणवत्ताहीन कार्य हो रहे हैं. सड़क और पुल समय से पूर्व ख़राब हो रहे हैं.
आलम ये है कि अब नेता भी खुले आम यह बयान देने से पीछे नहीं हटते कि मोहब्बत और भ्रष्टाचार कभी ख़त्म नही हो सकते सिर्फ बाबू बदल जाते हैं. एक तरफ तो प्रधानमंत्री केरल, तमिलनाडु में लोगों को जाकर कहते हैं कि भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए जबकि छत्तीसगढ़ के उन्ही के पार्टी के नेता अजय चंद्राकर भ्रष्टाचार के सवाल पर ऐसा बयान देते हैं जो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनता है.
अब इस देश से भ्रष्टाचार खत्म होगा या नहीं इसको लेकर भाजपा में ही दो मत है, तो आम जनता इसके खत्म होने की क्या ही उम्मीद करेगी. जबकि पार्टी अगर चाहती है देश से भ्रष्टाचार खत्म हो तो पहले उसे खुद को अपने ही पार्टी के नेताओं को कमीशनखोरी करने पर कार्रवाई करना चाहिये.
कमीशनखोरी के कारण सरकारी परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है. कमीशनखोरी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी क्षेत्र के व्यक्तियों को अपने पद का दुरुपयोग करने के लिए प्रेरित करती है. वे वैध प्रक्रियाओं को दरकिनार कर या अनुचित लाभ प्रदान कर अवैध रूप से धन कमाने का अवसर देखते हैं.
यदि ऐसा ही चलता रहा तो भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता रहेगा. इससे महंगाई बढ़ेगी और आम जनता त्रस्त रहेगी.