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पहली किश्त मिलने के बाद भी नहीं बन रहा आवास, तहसील ऑफिस में पेशी के चक्कर काट रहा हितग्राही.

बसना जनपद के  ग्राम पंचायत कुरचुंडी में एक हितग्राही पिरितराम शंकर प्रधानमंत्री आवास की पहली किश्त मिल जाने के बावजूद अब तक अपने आवास का निर्माण प्रारंभ नहीं किया है, जानकारी के अनुसार हितग्राही को आवास के लिए स्वीकृति 2018-19 में मिल चुकी थी जिसके बाद उसे 35 हजार रूपये भी पहली किश्त में आये. लेकिन निर्माण में विलम्ब होने की वजह से उसे बसना तहसीलदार द्वारा जनवरी 2019 में स्पष्टीकरण का नोटिस भेजा गया था. लेकिन उसके बाद भी अब तक आवास का कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया.

जारी नोटिस में पहली किश्त मिल जाने के बावजूद आवास निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किये जाने के कारण तहसीलदार द्वारा 23 जनवरी 2019 को नोटिस जारी कर 31 जनवरी 2019 को न्यायलय में उपस्थित होने को कहा था. लेकिन पिरितराम अपने आवास नहीं बन पाने का कारण तहसीलदार के अन्य नोटिस को बता रहें है जो कि 20 अगस्त 2018 को जारी किया गया था.

इस आदेश के अनुसार बसना तहसीलदार द्वारा इस निर्माण पर रोक इसलिए करवा दी गई क्योंकि जहाँ आवास का निर्माण करवाया जा रहा था वह किसी अन्य की जमीन थी, जिसकी शिकायत किये जाने पर तहसीलदार ने आदेश जारी कर रोक लगा दिया था.

बताया गया था कि जिस जमीन में पिरितराम आवास बना रहा था वह  हेमलाल पिता दुरुग जाती तेली ग्राम कप्सा खुटा जो आज के समय मे मृतक है उसके नाम पर दर्ज है, आवास बनाये जाने के बाद हेमलाल ने इसकी शिकायत की थी कि उसके नाम पे दर्ज भूमि पर आवास बनाया जा रहा है. आवेदक के हेमलाल अनुसार पिरितराम के द्वारा 2018 में जबरन कब्जा कर जमीन को प्रधानमंत्री आवास बनाने का आरोप लगाया गया था.

इस विवाद को लगभग 1 साल हो जाने के बाद आवेदक हेमलाल की मृत्यु हो गई और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभार्थी पिरितराम यादव प्रधानमंत्री आवास के साथ साथ अब उसको घर बनाने के लिए जमीन भी नही मिल रहा है.

पिरितराम का कहना है कि जिस जगह प्रधानमंत्री आवस बनाया जा रहा था वहां सालों पहले से उसके पूर्वज रहते आये है वह घास जमीन थी, जानकारी के अभाव में वह पट्टा नही बना पाया जिसके बाद हेमलाल ने उसे अपनी जमीन बताकर प्रधानमंत्री आवास पर रोक लगा दिया. प्रधानमंत्री आवास में स्टे के कारण हितग्राही द्वारा जो समान खरीद कर लाया था वह पानी मे बह चुका है, चुकी पिरितराम के पास रहने के लिए भी जगह नही है इसलिए वह गाँव को छोड़ने विवश हो रहा है, और आज भी उसका पूरा परिवार टूटे हुए घर में रह गुजारा कर रहा है. और लगातार तहसील ऑफिस में पेशी के चक्कर काट रहा है.


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