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भारत सरकार ने उड़ान के तहत छत्तीसगढ़ के 3 हवाई अड्डों के उन्नयन के लिए 108 करोड़ रूपए आवंटित किये: हरदीप सिंह पुरी

नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत सरकार ने उड़ान योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 3 हवाई अड्डों के उन्नयन एवं विकास के उद्देश्य से जगदलपुर के लिए 48 करोड़ रूपए (व्यय 45 करोड़ रुपए), अंबिकापुर के लिए 27 करोड़ रूपए (व्यय 27 करोड़ रुपए) और बिलासपुर के लिए 33 करोड़ रूपए (व्यय 20 करोड़ रूपए) आवंटित किये हैं। उड़ान योजना के तहत आज एलायंस एयर द्वारा जगदलपुर से रायपुर एवं हैदराबाद के लिए उड़ान सेवा के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए,  पुरी ने कहा कि यह हवाई संपर्क इस क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगा। इस आभासी कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल, बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री  प्रेम साई सिंह, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास एवं स्वास्थ्य मंत्री  टी.एस. सिंह देव, बस्तर के सांसद  दीपक बैज तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इन गणमान्य नागरिकों ने पहली बार यात्रा कर रहे यात्रियों,जो उड़ान योजना के तहत नए हवाई मार्ग के उद्घाटन से बहुत खुश लग रहे थे, के साथ बातचीत भी की।

 पुरी ने आगे बताया कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने रायपुर हवाई अड्डे के विकास एवं विस्तार, जिसमें टर्मिनल भवन का विस्तार भी शामिल है, के लिए लगभग 900 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। हाल ही में, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान-4.0 के तहत बिलासपुर से भोपाल तक आरसीएस फ्लाइट के संचालन, जिसके जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है, के लिए एलायंस एयर की बोली को मंजूरी दी थी।

एयर इंडिया की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एलायंस एयर को उड़ान-3 बोली प्रक्रिया के तहत इस मार्ग पर परिचालन की अनुमति दी गयी थी। यह एयरलाइन दैनिक उड़ानों का संचालन करेगी और इस मार्ग पर 72 सीटों वाले लक्जरी एटीआर 70 विमानों को तैनात करेगी। जगदलपुर-रायपुर-हैदराबाद मार्ग की शुरूआत होने के साथ नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आरसीएस–उड़ान के तहत कुल 285 मार्गों पर परिचालन शुरू किया है।

जगदलपुर हवाई अड्डा, बस्तर में स्थित है, जो अपनी अनूठी आदिवासी संस्कृति एवं विरासत के कारण पर्यटन की अपार संभावना वाला एक जनजातीय जिला है। इसके अलावा,  इस क्षेत्र में कई फर्नीचर कारखानों एवं चावल मिलों के मौजूद होने के कारण जगदलपुर एक व्यावसायिक केंद्र भी है। नतीजतन, कई लोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए जगदलपुर और निकटतम महानगर हैदराबाद के बीच अक्सर यात्रा करते हैं। इन दोनों शहरों के बीच उड़ान शुरू होने से सड़क एवं ट्रेन यात्राओं में वर्तमान में लगने वाला 12 घंटे का समय घटकर 75 मिनट रह जायेगा। लोग अब जगदलपुर से राजधानी रायपुर सड़क मार्ग से 7 घंटे की यात्रा की तुलना में केवल 45 मिनट में पहुंच सकते हैं।

इन मार्गों पर उड़ानों की शुरुआत न केवल लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगी तथा नए गंतव्यों के बीच यात्रा के समय में भारी कमी लायेगी, बल्कि इस क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करेगी। जगदलपुर को स्वर्ग भूमि के रूप में जाना जाता है और इसे पलायनवादियों के सपनों की भूमि का नाम दिया जाता है क्योंकि यह शहर चित्रकोट जलप्रपात के लिए प्रसिद्ध है, जिसे 'भारत का नियाग्रा जलप्रपात' भी कहा जाता है। जगदलपुर अपने वन्यजीवों, मंदिरों, गुफाओं, झीलों, संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए भी जाना जाता है। इस शहर में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान एवं इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान जैसे राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। कुछ समय पहले पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटकों की संख्या एवं भविष्य की पर्यटन क्षमता के आधार पर जगदलपुर-तीरथगढ़-चित्रकूट-बारसूर-दंतेवाड़ा-तीरथगढ़ सर्किट की पहचान भारत के 45 मेगा पर्यटन स्थलों / सर्किटों में से एक के रूप में की थी।

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