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क्या है PLI स्कीम ? अगले 5 वर्षों के दौरान प्रोत्साहन के रूप में दिए जायेंगे इस स्कीम को 6,238 करोड़ रुपये

केंद्र सरकार ने देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए PLI स्कीम की शुरुआत की है. इसके जरिए कंपनियों को भारत में अपनी यूनिट लगाने और एक्सपोर्ट करने पर विशेष रियायत के साथ-साथ वित्तीय सहायता भी दी जाती है.अगले पांच साल में देश में प्रोडक्शन करने वाली कंपनियों को 1.46 लाख करोड़ रुपये का इंसेंटिव देगी. इससे देश में प्रोडक्ट बनने से भारत का इंपोर्ट पर खर्च घट जाएगा. देश में जब सामान बनेगा तो रोजगार के भी नए अवसर तैयार होंगे.एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्कीम के तहत विदेशी कंपनियों को भारत में फैक्ट्री लगाने के साथ-साथ घरेलू कंपनियों को प्लांट लगाने में मदद मिलेगी. यह योजना 5 साल के ​लिए है.इसमें कंपनियों को कैश इंसेंटिव मिलेगा. इस स्कीम का लाभ सभी उभरते सेक्टर जैसे कि ऑटोमोबाइल, नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, उन्नत रसायन विज्ञान, टेलिकॉम, फार्मा, और सोलर पीवी निर्माण आदि ले सकते हैं.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इकोनॉमी का पहिया तेज घुमाने सरकार मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहती है. इसी की तहत पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया जा रहा है.मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार की संभावना ज्यादा है इसलिए पीएलआई स्कीम पर सरकार का पूरा जोर है.

इससे क्या होगा

फार्मा के बाद अब टेलीकॉम उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए पीएलआई के तहत 12,195 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना बनाई गई है. सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के तहत अगले पांच साल में 2,44,200 करोड़ रुपये के टेलीकॉम उपकरणों का उत्पादन होगा.

बनेंगे नई नौकरियों के मौके

सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि इससे 40 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. इससे 1.95 लाख करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट होगा . ऐसे में कुल 17000 करोड़ रुपये का टैक्स रेवेन्यू पैदा होगा. सरकार इसके जरिए भारत को दुनिया के टॉप 3 स्मार्टफोन उत्पादक देशों में शामिल करना चाहती है.रिसर्च फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीकॉम मैन्युफैक्चिरिंग में पीएलआई की घोषणा बड़ा कदम है. इससे देश में स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों को 4 से 6 फीसदी की टैक्स छूट मिल सकती है.1.46 लाख करोड़ रुपये के दूसरे PLI इन्वेस्टमेंट से लगभग 62 फीसदी निवेश कार, बैटरी और दवा बनाने पर होगा. सरकार के लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की कोशिशों का सबसे ज्यादा फायदा इलेक्ट्रिक कार, बैटरियां, फूड प्रोसेसिंग और कपड़े बनाने वाली कंपनियों को होगा.



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