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उबर इंडिया ने 600 लोगों को किया बाहर, OLA पहले ही निकाल चुकी है 1400 कर्मचारी

ऐप बेस्ड कैब सेवा प्रदाता कंपनी उबर इंडिया ने मंगलवार को घोषणा की है कि वो 600 फुल टाइम काम करने वाले कर्मचारियों को निकाल रही है। इससे पहले ओला ने भी 1400 कर्मचारियों को अपने यहां से बाहर किया है। उबर के भारत व दक्षिण एशिया के प्रेसीडेंट प्रदीप परमेस्वरन ने इस बात की जानकारी दी।

कुल कर्मचारियों का एक चौथाई हिस्सा

ये उसकी कुल वर्कफोर्स का एक चौथाई यानी कुल 25 फीसदी है जो कि काफी बड़ी संख्या कही जा सकती है। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से कंपनी ने यह फैसला लिया है। जिन कर्मचारियों को निकाला जा रहा है उनमें ड्राइवर्स से लेकर राइडर सपोर्ट ऑपरेशंस के स्टाफ से लेकर दूसरे कार्यों से जुड़े लोग शामिल हैं।

उबर ने अपने इन निकाले गए कर्मचारियों को तीन महीने की बेसिक सैलरी और छह माह तक मेडिकल बीमा दिया है। प्रदीप परमेस्वरन ने कहा कि यह फैसला लेना काफी दुख भरा है, लेकिन भविष्य के लिए काफी जरूरी था।

पहले ही निकाल चुकी है 3700 कर्मचारी

मई की शुरुआत में भी उबर अपने 3700 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी है। इसके साथ ही कंपनी अब तक 25 फीसदी स्टाफ को कम कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी ने वैश्विक स्तर पर 45 कार्यालयों को बंद कर दिया है।

उबर की हुई थी आलोचना

लॉकडाउन के कारण अब दुनिया की सबसे बड़ी कैब सर्विस कंपनी उबर (Uber) ने भी आखिरकार अपने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। लेकिन निकालने का तरीका इतना बुरा था कि पूरी दुनिया में लोगों ने सोशल मीडिया पर इसकी कड़ी आलोचना की है।

वीडियो कॉल के जरिए दी जानकारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उबर के कस्टमर सर्विस प्रमुख रॉफिन शेवले ( Ruffin Chaveleau) ने एक वीडियो कॉल के लिए कंपनी के 3700 कर्मचारियों को जोड़ा और मात्र तीन मिनट में सभी को नौकरी से निकालने की घोषणा कर दी। कंपनी के इस फैसले की दुनियाभर में मानवाधिकार से जुड़े लोगों ने कड़ी निंदा की है। लंबे समय तक सेवा देते आ रहे कर्मचारियों को बेहद असंवेदनशील तरीके निकालने की आलोचना भी हो रही है।

ओला ने किया 1400 लोगों को बाहर

बेंगलूरू स्थित ऐप आधारित कैब सेवा प्रदाता कंपनी ओला ने भी 1400 कर्मचारियों को बाहर कर दिया है। इसमें कंपनी की कैब, वित्तीय सेवा और फूड कारोबार में शामिल कर्मी हैं। कंपनी की कमाई पिछले दो माह में 95 फीसदी कम हो गई है। इस बात की जानकारी देते हुए कंपनी के सीईओ भावीश अग्रवाल ने कहा कि ऐसे दौर में आगे कंपनी चलाना मुश्किल होता जा रहा है। कोरोना से ओला के लिए कैब चलाने वाले ड्राइवर और उनके परिवार को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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