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आरंगी समिति धान घोटाला, 2 करोड 94 लाख रूपये के अमानक धान की अफरा-तफरी.

संग्रहण केन्द्र में दो करोड़ 94 लाख रुपये का धान अमानक करार.

अमानक धान को संग्रहण केंद्र से राईस मिलरों को दबाव पूर्वक देने में जुटे अधिकारी एवं कर्मचारी.

राईस मिलरों में फैलने लगा है जबरदस्त आक्रोश, डी ओ निरस्त करने लिखा गया पत्र.

मोटी रकम लेनदेन कर लीपापोती करने का प्रयास जारी.

कृषि साख सहकारी समिति आरंगी विकास खंड पिथौरा में सुनियोजित रूप से अंजाम दिए गए धान घोटाले को लेकर अंचल के ग्रामीण किसानों द्वारा जांच की मांग की जा रही है | स्थानीय कृषकों एवं जनप्रतिनिधीयों ने मामले की शिकायत जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री सचिवालय से की है | शिकायत में आरंगी के धान घोटाले के तमाम तथ्यों को अधिकारीयों के संज्ञान में लाया गया है | बताया जाता है कि  धान खरीदी केंद्र आरंगी में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है |

प्रशासन को की गई शिकयत के अनुसार  आरंगी धान खरीदी केंद्र के प्रभारी उमेश भोई पर बिना धान खरीदी के फर्जी तरीके से खरीदी चढ़ाकर कर करोडो के वारे न्यारे करने का आरोप लगाया गया है | बताया जाता है कि धान खरीदी की शिकायत के बाद जब जांच टीम ने खरीदी केंद्र मे खरीदे गए धान के बोरियों का वजन करवाया तो बोरियों मे धान का वजन भी कम पाया गया था।

संग्रहण केन्द्र गढफुलझर के प्रभारी पवन नामदेव द्वारा बताया जा रहा है कि आरंगी धान उपार्जन केंद्र से गढफुलझर संग्रहण केंद्र में भेजे गए 29333 बोरी धान, वजन 11733 क्विंटल धान को जिसकी कीमत दो करोड़ 93 लाख 33 हजार रूपये के छः स्टेक धान अमानक पाया गया है | इसे अधिकारियों के निर्देश पर संग्रहण केंद्र में अलग से बाहर रखा गया है।श्री नामदेव ने बताया कि आरंगी समिति के अमानक धान को संग्रहण केंद्र में स्वीकार नहीं किया गया है। तथा अमानक धान का पंचनामा बनाकर उपार्जन केंद्र आरंगी के प्रभारी को लिखित में पत्र भेजा गया है। उक्त अमानक धान की कोई भी जवाबदेही संग्रहण केंद्र नहीं है।

राईसमिल मालिकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार संग्रहण केन्द्र गढफुलझर के प्रभारी द्वारा सहकारी समितियों द्वारा दिये गए अमानक धान को कस्टम मिलिंग के लिए जबरन देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जिससे राईस मिलर्स अमानक धान को संग्रहण केंद्र से लेने मना किया जा रहा है। अमानक धान को संग्रहण केंद्र से लेने में इंकार करने पर संग्रहण केन्द्र प्रभारी द्वारा ट्रकों को वापस कर दिया गया है।

संग्रहण केन्द्र में राईसमिलों को अमानक धान दबावपूर्ण ढंग से देने से राईस मिल मालिकों ने लिखित में अमानक धान लेने से इंकार करते हुए डी ओ निरस्त करने की बात कही गई है। इस दबाव पूर्वक अमानक धान देने के लिए राईस मिलरों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है।

आरंगी धान खरीदी केंद्र मे सरकारी रिकार्ड मे 24 करोड़ 73 लाख 29 हजार 5 सौ 96 रुपये की 136210.40 क्विंटल धान की खरीदी करना दर्शाया गया है | जबकि हकीकत में इतना अधिक धान आरंगी के खरीदी केंद्र पर आया ही नहीं |

धान उपार्जन केंद्र आरंगी में वर्तमान में शासकीय रिकार्ड के अनुसार 929 क्विंटल 80 किलो धान शेष बता रहा है। किन्तु वर्तमान में उपार्जन केंद्र में पाँच बोरी धान भी नहीं दिख रही है। उक्त धान की कमी को पूर्ति करने के लिए प्रभारी द्वारा अँचल के किसानों एवं ब्यापारियों से रवि फसल के धान खरीदी करने का प्रयास किया जा रहा है।केन्द्र प्रभारी के द्वारा ग्रामीण अँचल के दो तीन किसानों से 1200 रुपये में रवि फसल की कुछ धान की खरीदी भी कर ली गई है। जिसका विडियो क्लिप भी बना कर ग्रामीण जन रखे हुए हैं, जो जाँच के समय अधिकारियों के सामने खुलासा करेंगे।

1 लाख 36 हजार क़्वींटल के धान खरीदी में, प्रति क्विंटल लगभग 20 किलो धान कम है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है। की सरकार को कर्मचारियों द्वारा कितने करोड़ का चुना लगाया गया है ? शासन  के  0 % शॉर्टेज लाने के फरमान में बाद खरीदी प्रभारी द्वारा अँचल के राईसमिलों से अमानक एवं सडे गले धान को 9 सौ से 1100 सौ रुपये की दर से खरीदी कर संग्रहण केन्द्र गढफुलझर को भेज दिया गया है।साथ ही साथ किसानों के रवि फसल के धान को खरीब के फसल के बदले संग्रहण केंद्र भेजने के लिए खरीदने का प्रयास किया जा रहा है। नियमतः खरीब के धान के बदले रवि फसल के धान को संग्रहण केंद्र नहीं भेजा जा सकता है | लेकिन मामले को रफा-दफा करने के लिए इसे अंजाम देने का प्रयास जारी है | उधर जांच के दौरान मौके पर उपस्थित किसानों का कहना है की इस बार 0 % शार्टेज आना है। जिसकी ज़िम्मेदारी धान खरीदी केंद्र प्रभारी की है। शार्टेज आएगा तो  खरीदी प्रभारी भरेगा। उनके मुताबिक शार्टेज आने से समिति को नुकसान होता है ।

इधर महासमुंद के नव पदस्थ जिला विपणन अधिकारी श्री कर्ष से इस सम्बन्ध में चर्चा करने के लिए सम्पर्क करने का प्रयास किया गया। किन्तु उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया।

इस फर्जीवाड़ा को लेकर आरंगी धान खरीदी केन्द्र प्रभारी उमेश भोई से बात करने की कोशिश की गई। किन्तु उन्होंने जांच का हवाला देते हुए बात करने से इंकार कर दिया।


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