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पुलिया निर्माण कार्य मे भारी लापरवाही...सीमेंट गिट्टी के बदले डाला जा रहा जंगली पत्थर.. कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से शिकायत...

रायगढ़ जिले के सारंगढ़ तहसील की बात ही निराली है, कभी राजनेताओं का गढ़ कहे जाने वाले सारंगढ़ अब वर्तमान में कुछ सरपँच और सचिव के कारनामो के कारण अखबार की शुर्खियाँ बटोर रही है। दिखने में मात्र गलती सरपँच/सचिव की लगती है लेकिन इसका जड़ सरकारी नुमाइंदों से लेकर राजनेताओं तक फैला है ऐसा प्रतीत होता है।

क्योंकि बिना इनके संरक्षण के कोई पँचायत खुलेआम भ्रष्टाचार करने को सोच ही नही सकता। लेकिन जब “सरकारी पैसा चट कर जाओ.. कमीशन हमे दो, तुम भी कमाओ” सोच रखने वाले सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों का सरंक्षण हो तो भला कोई सरपंच क्यों किसी जनता या पत्रकार से डरे.. कहने को तो निर्माण कार्य इंजीनियर और टी ए की देखरेख और मानक मापदंड से ही होनी चाहिए जिससे सरकार द्वारा जनहित में कराये जा रहे निर्माण कार्य जनहित में काम आये।

लेकिन पैसे कमाने के लालच में कुछ सरपँच इतने अंधे हो जाते हैं कि उन्हें सिर्फ पैसे की हरियाली ही दिखता है, उसके आगे न तो जनता नजर आती है न गुणवत्ता। सारंगढ़ में बहुत से सरपँच ऐसे हैं जो अपने कार्यकाल में विकास कार्यों के प्रति गम्भीर हैं और अपने पँचायत के विकास में दिन-रात लगे हैं। सरपँच/ सचिव के कोरोनकाल के योगदान को भुलाया नही जा सकता। सारंगढ़ अंचल में कई सरपँच हैं जो खुद के खर्चे से गरीबों को महामारी में दिल खोलकर मदद भी किये है, लेकिन कुछ ऐसे भी पँचायत हैं जो ईमानदार सरपंचो के अच्छे कार्य को धूमिल करने हेतु कोई कसर भी नही छोड़ रहे हैं।

15 साल से वनवास झेलकर आयी कांग्रेस सरकार आगामी चुनाव के मद्देनजर प्रदेश के सुदूर अंचल तक विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर करोड़ों खर्च कर रही है, जिसे पँचायत स्तर पर प्रतिनिधि बन कर सरपँच और उनके सहयोगी कैसे बंदरबाट करते हैं इसका जीता जागता उदाहरण सारंगढ़ तहसील के ग्राम पंचायत सरायपाली के युवा सरपँच से सीखने को मिल सकती है।

जहां सरकारी राशि का मरम्मत, सफाई और अन्य कार्यों के नाम से सफाया करने के साथ अभी पुलिया निर्माण जो कि गिट्टी सीमेंट की उचित मात्रा से ही बननी चाहिए लेकिन अपनी पॉकेट भरने के उद्देश्य से सरपँच द्वारा गिट्टी सीमेंट की जगह जंगली पत्थर बीच मे डालकर ही बेहद घटिया निर्माण कार्य कराया जा रहा है। अब आप ही अंदाजा लगा सकते हैं 3 लाख 10 हज़ार रुपये में स्वीकृत कार्य को जंगली पत्थर डाल कर निर्माण कराया जा रहा पुलिया कितना टिकाऊ बनेगा ?

जनहित में सरकार द्वारा बनवाये जा रहे निर्माण कार्यों में अगर इस कदर पँचायत द्वारा गुणवत्ताहीन कार्य कराकर कुछ रुपये तो अपनी पॉकेट में भर लेंगे लेकिन आम जनता के भलाई के लिए बन रहे पुलिया के स्तर कैसे होगा आप अंदाजा लगा सकते हैं।

क्या कहना है सरपँच का-

3 लाख 10 हज़ार की राशि स्वीकृत हुवी थी। हमने कोई जंगली पत्थर नही डाला है। हमलोग काम करवाये हैं उसमें जंगली पत्थर नही डाले है। अगल बगल में पत्थर है चला गया होगा। मैं बैठकर काम करवा रहा था तब तक नही डाले थे मेरे भगने के बाद डाल दिये होंगे।

क्या कहते हैं इंजीनियर दिनेश नायक:-

मुझे निर्माण कार्य की शिकायत मिली थी , लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण छुट्टी में था। मेरे अंतर्गत 44 पँचायत आते हैं 3 तारीख से कवारेंन टाईन में था । सीईओ साहब मेरे को सूचित किये तो मैंने टी.ए.(तकनीकी सहायक) महेश्वर मनहर को भेजा ऊपर में जंगली पत्थर डाले थे जिसे निकलवाया गया। सरपँच द्वारा मेरी छुट्टी का नाजायज़ फायदा उठाया गया। सरपँच सचिव के बोलने पर ही मिस्त्री डाले होंगे क्योंकि निर्माण एजेंसी तो पँचायत ही है।

क्या कहते हैं सीईओ अभिषेक बैनर्जी-

मेरे को शिकायत प्राप्त हुवी है, जनपद से जांच टीम गठित किया जा रहा है। जांच के बाद सब क्लियर हो जायेगा। आज कल में टीम बन जायेगा।

कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से लिखित में शिकायत-

शिकायत में कहा गया है कि जनपद पंचायत सारंगढ़ क्षेत्रांतर्गत ग्राम पंचायत सराईपाली के आश्रित ग्राम दमदरहा स्थित तालाब पार में पुलिया निर्माण स्वीकृत हुआ है, जिसका कार्य एजेंसी सरपंच ग्राम पंचायत सराईपाली है। उक्त पुलिया निर्माण कार्य को लीपापोती करते हुये शासकीय राशि को गबन करने के उद्देश्य से प्रशासकीय स्वीकृति/मानक के विरूद्ध पूर्णतः घटिया निर्माण किया
जाकर धांधली की जा रही है तथा मानक के आधार पर जिस स्थान पर गिट्टी, सीमेंट का उपयोग होना है वहां जंगली पत्थर डाला जा रहा है। अतः प्रार्थना है कि ग्राम पंचायत सराईपाली के आश्रित ग्राम दमदरहा के तालाब पार में स्वीकृत पुलिया निर्माण को प्रशासकीय स्वीकृति के विपरीत/मानक के विरूद्ध घटिया निर्माण करने के संबंध में त्वरित उचित कार्यवाही करने की कृपा करें।