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शिकायतकर्ता के विरुद्ध शिकायत करवाकर बने जांच अधिकारी , रोचक तथ्य स्वास्थ्य विभाग में अजब गजब

जिला अस्पताल नारायणपुर के लगभग आधा दर्जन से अधिक डॉक्टर वर्तमान अस्पताल अधिक्षक डॉक्टर विनोद भोयार और डॉक्टर आदित्य केकेती के विरुद्ध वेतन रोकने, ग्रामीण भत्ता रोकने , अव्यवसायिक भत्ता रोकने एवं प्रताड़ना जैसे अन्य आरोप संघ के माध्यम से साक्ष्यों के साथ विभागीय संचालक एवं विभागीय मंत्री को ज्ञापन सौंपने के तुरंत 4 दिवस बाद ही शिकायत कर्ता एवं हस्ताक्षर कर्ता डॉक्टर केशव साहू प्रदेश सचिव CIDA के विरुद्ध अज्ञात व्यक्ति द्वारा आरोप की जांच का कमान डॉक्टर आदित्य केकेती एवं उनके साथियों को दिया गया ।

जबकि जांच कर्ता अधिकारी डॉक्टर आदित्य केकेती के ऊपर A/ तदर्थ नियुक्ति क्रमांक 142 ,दिनांक 30/6/2012 के बावजूत अनाधिकृत रूम से अध्यन अवकाश में बिना किसी अवकाश स्वीकृत के जाना ।

B/ तात्कालिक अस्पताल अधीक्षक एवम लेखापाल को धोखा देते हुए पूरे अध्ययन काल का वेतन आहरण किया जाना ।

C/ बीजेपी शासन काल में शल्य क्रिया में दुर्गम क्षेत्र में पदस्थ होने के बावजूद सहभागिता नही देना । जिससे तत्कालीय स्वास्थ्य सचिव महोदय प्रसन्ना सर द्वारा वीडियो कोंफ्रेशिक के मध्यम से तात्कालिक अस्पताल अधीक्षक को कड़े निर्देश व कार्यवाही हेतु कहना ।

D/ आज दिनांक तक शल्य विभाग का अनुबंध पूरा नहीं करना । जिससे संचालक महोदय द्वारा पत्र क्रमांक एफ 08– 24 /2019/ विज्ञप्त /2199 दिनांक 03/12/2019 को अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु पत्र प्रेषित करना ।

E/ तदर्थ नियुक्ति में अपनी सहमति देने के बाद भी आज पूरे कांग्रेस शासन काल में आपातकाल सेवा नही देना ।

F/ तदर्थ नियुक्ति में अपनी सहमति देने के बाद भी आज पूरे कांग्रेस शासन काल में आपातकाल सेवा नही देना ।

जैसे अन्य आरोप शासन के आदेश के साथ संघ ने लगाया ,पर इसके उलट डॉक्टर केकेती को डॉक्टर केशव साहू के ऊपर भ्रष्टाचारी एवं प्रताड़ना का आरोप का जांच अधिकारी ही नियुक्त कर दिया गया ।

सभी दस्तावेजों के साथ डॉक्टर केशव साहू द्वारा बस्तर संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं के पास शिकायत करने पर पूर्व में गठित जांच दल को विलोपित कर नवीन जांच दल बना दिया गया परन्तु डॉक्टर केकेती द्वारा अपने साथियों के साथ मिल कर न सिर्फ अमान्य जांच रिपोर्ट जमा किया एवं सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी तो उसे अमान्य जांच रिपोर्ट को साझा भी किया ।

  अब जांच कर्ता ही शिकायत कर जांच रिपोर्ट बनाए तो वहीं पुरानी कहावत स्वास्थ्य विभाग के लिए सटीक बैठता नजर आता है – रक्षक ही भक्षक।



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