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बसना : केवल बिस्तर बढ़ाये जा रहे, कई उपकरणों की कमी, निजी अस्पताओं के रिपोर्ट के भरोसे विशेषज्ञ, भटक रहे मरीज.

महासमुंद जिले का बसना ब्लाक राजनीति के क्षेत्र में आज दिल्ली तक पहुँच चूका है. राजनीति की क्षेत्र में वर्ष 2024 बसना के लिए के नया आयाम लेकर आया, इस क्षेत्र से छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए तीन विधायक, और देश की लोकसभा को एक सांसद मिला. जिसके बाद बसना नगर के नागरिकों में विकास होने की उम्मीद जगी.

लेकिन जिस तरह का विकास बसना क्षेत्र में हो रहा है, वह समझ से परे है. आज हम बात करेंगे स्वास्थ्य विभाग की. छत्तीसगढ़ के बजट में इस वर्ष बसना के लिए 100 बिस्तर अस्पताल से 200 बिस्तर अस्पताल करने की बात कही गई है. लेकिन सवाल यह है कि क्या अस्पताल में बिस्तर बढ़ा देने से विकास और स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़कर सही तरह से स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलने लग जाती है ? इसका सही जवाब तो यहाँ पहुँचने वाला मरीज ही बता सकता है.

बसना नगर में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का पुन: निर्माण कर उसे व्यवस्थित और मार्डन बनाया गया है. बच्चों का टीकाकरण, सर्दी, बुखार, शुगर जैसे कुछ बिमारियों का ईलाज भी सही तरीके से हो रहा है. लेकिन गंभीर समस्या के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक रेफर सेंटर बन चूका है, सरकार विकास के नाम पर सिर्फ भवन उपलब्ध करा रही है, जबकि इलाज करने के लिए इस भवन में डॉक्टरों के पास उपकरणों की कमी है, या फिर कहा जा सकता है कि अस्पताल के पास उपकरण ही नही है. जिसके चलते कुछ विशेषज्ञ निजी अस्पतालों के भरोषे बैठे हैं. शायद उन्हें भी यह समझ ना आ रहा हो कि ऐसे कम उपकरणों के साथ उनका भविष्य सही दिशा में है या अँधेरे में ?

अब बात करते हैं समस्या की, आज दांत के दर्द से पीड़ित एक युवक बसना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अपने दांत का इलाज करवाने पहुंचा, जहाँ बीते कई महीनों से अब तक पार्किग को लेकर हो रही समस्या अब तक जारी है, इसपर जनप्रतिनिधि केवल आश्वाशन दे रहे हैं, इसके चलते आज भी मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

अस्पताल में इलाज करवाने के पूर्व पंजीयन कराना होता है, डिजिटल क्षेत्र में देश ने अब इतनी तरक्की कर ली है कि, मरीज अपना पंजीयन अब खुद अपने मोबाइल से आभा एप डाउनलोड कर कर सकता है. जिसके बाद पंजीयन कक्ष से उसे पंजीयन का प्रिंट लेकर डॉक्टर के पास जाना होता है. बसना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दंत रोग विशेषज्ञ मौजूद है, जहाँ युवक पंजीयन के बाद दंत रोग विशेषज्ञ को अपनी समस्या बताने पहुंचा.

विशेषज्ञ ने समस्या सुनने के बाद पर्ची पर कुछ दवाइयां लिख दी, लेकिन विशेषज्ञ पूर्ण तरीके से इस समस्या का निवारण करने के असमर्थ थे, विशेषज्ञ ने मरीज को बताया कि दांत की स्थिति जानने के लिए एक्स-रे की आवश्यता है, जिसके लिए अस्पताल में उपकरण नही है, इसलिए आपको बहार किसी क्लिनिक से दांत का एक्स-रे करवाना होगा उसके बाद ही आगे का उपचार किया जा सकता है.

मतलब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दंत रोग का विभाग और विशेषज्ञ होने के बावजूद युवक का वहां जाना व्यर्थ हो गया. यदि किसी कारणवश एक्स-रे में समस्या हुई तो दुबारा निजी क्लिनिक जाकर फिर से एक्स-रे करवाकर वापस आना होगा. वहीँ एक्स-रे के लिए रेफर कर दिए जाने के बाद डॉक्टर को भी दुबार उस मरीज के आने की उम्मीद नही होगी.

यदि राजनीति पृष्ठभूमि की बात करें तो वर्त्तमान बसना नगर पंचायत की निर्विरोध निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. खुशबु अग्रवाल स्वयं ही दन्त रोग विशेषज्ञ हैं, यदि वे यहाँ का जायजा लेकर अस्पताल के उपकरणों में हो रही कमी की मांग शासन से करे तो शायद यहाँ पहुँचने वाले मरीजों को राहत मिल सकती है. अन्यथा उपकरणों की कमी के चलते यह 200 बिस्तर का अस्पताल नही, बल्कि रेफर सेंटर अथवा हॉस्टल कहलायेगा.



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