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महासमुंद : एग्रीस्टैक पंजीयन, पीएम किसान सत्यापन एवं खरीफ तैयारी कार्यों की कलेक्टर ने की समीक्षा

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में जिला पंचायत महासमुंद सभाकक्ष में गत दिवस कृषि एवं समवर्गीय विभागों के समस्त विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारियों तथा जिले के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एग्रीस्टैक पंजीयन, पीएम किसान सम्मान निधि योजना, खरीफ तैयारी, उर्वरक वितरण, जैविक खेती, दलहन-तिलहन विस्तार एवं पशुपालन-उद्यानिकी विभाग की योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार, विकासखंड स्तरीय अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।

बैठक में कलेक्टर लंगेह ने एग्रीस्टैक पोर्टल में छूटे हुए किसानों का प्राथमिकता से पंजीयन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों में आवश्यक सुधार कर हिस्सेदार कृषकों का भी पंजीयन सुनिश्चित किया जाए ताकि पात्र किसान शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने हेतु एग्रीस्टैक में पंजीयन कर पात्र किसानों का सत्यापन शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उक्त कार्यों को आगामी 10 दिवस के भीतर सुशासन तिहार एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान अंतर्गत आयोजित शिविरों के माध्यम से पूर्ण करने कहा गया।

कलेक्टर ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, रागी एवं मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों के रकबा विस्तार के लक्ष्य को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में स्थापित की जा रही रागी प्रोसेसिंग यूनिट के कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने तथा तेल प्रसंस्करण इकाई की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में खरीफ सीजन हेतु रासायनिक उर्वरकों के वितरण की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया गया कि सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा पीओएस मशीन के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर किसानों को खाद वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को उनकी भूमि की पात्रता से अधिक रासायनिक खाद का वितरण न किया जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर श्री लंगेह ने किसानों को डीएपी के स्थान पर संतुलित उर्वरकों जैसे एनपीके एवं एसएसपी के उपयोग के लिए प्रेरित करने तथा इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। साथ ही रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने के उद्देश्य से हरी खाद के रूप में सन, ढैंचा, मूंग, उड़द एवं नील हरित काई के उपयोग को बढ़ावा देने तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने कहा।

उन्होंने कृषि विभाग के मैदानी अमले को विभिन्न योजना घटकों में लक्ष्य निर्धारित कर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा साप्ताहिक समीक्षा बैठकों में प्रगति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के रकबा विस्तार हेतु तैयार कार्ययोजना के अनुसार समय-सीमा में कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया। बैठक में पशुपालन विभाग को इच्छुक किसान एवं महिला कृषकों को अनुदान पर दो गाय उपलब्ध कराने, कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को बढ़ावा देने तथा बकरीपालन गतिविधियों के विस्तार हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। वहीं उद्यानिकी विभाग को जिले में 50 हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार कर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कहा गया।


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