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छत्तीसगढ़ में कैंसर से निपटने के लिए शुरुआती पहचान और उन्नत स्थानीय इलाज क्यों जरूरी हैं

भारत में कैंसर तेजी से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में यह समस्या और भी अधिक गंभीर है। बड़ी ग्रामीण आबादी, जागरूकता की कमी और विशेष चिकित्सा सेवाओं तक देर से पहुँच के कारण कई मरीजों में कैंसर का पता उन्नत चरणों में चलता है।

बेहतर उपचार परिणाम सुनिश्चित करने के लिए कैंसर की समय पर पहचान सबसे प्रभावी उपाय है। लेकिन, सामुदायिक स्तर पर नियमित जाँच और जागरूकता की कमी के कारण कई मामलों का पता बहुत देर से चल पाता है।

ऐसे समय में स्थानीय स्तर पर कैंसर देखभाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। बाल्को मेडिकल सेंटर, जिसे वेदांता लिमिटेड संचालित करती है, मध्य भारत के लोगों तक उन्नत, किफायती और समग्र कैंसर उपचार पहुँचाकर इस कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वर्ष 2018 से अब तक 170 बेड वाले इस गैर-लाभकारी ऑन्कोलॉजी केंद्र ने 65,000 से अधिक मरीजों का उपचार किया है और हजारों सर्जरी व कीमोथेरेपी सत्र संचालित किए हैं। यह क्षेत्र में कैंसर के बढ़ते बोझ के साथ-साथ उपचार सेवाओं तक बढ़ती पहुँच को भी दर्शाता है।

बाल्को मेडिकल सेंटर में देखभाल पूरी उपचार यात्रा को कवर करती है। इसमें रोकथाम, शुरुआती पहचान, इलाज, उपचार के बाद का जीवन (सर्वाइवरशिप) और पेनिएटिव केयर शामिल है। यह सेवाएँ मरीजों के घर के पास उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपना इलाज जारी रख सकें।

डॉ. भावना सिरोही ने कहा, “छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि मरीज अक्सर बीमारी के उन्नत चरणों में हमारे पास आते हैं। इसे बदलने के लिए जागरूकता, शुरुआती पहचान और उपचार तक पहुँच के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। स्क्रीनिंग कार्यक्रमों, सामुदायिक आउटरीच और विशेषज्ञों के साथ संवाद के माध्यम से हम बीमारी की पहचान को शुरुआती चरणों की ओर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। यह सब, सुलभ और व्यापक उपचार के साथ मिलकर, मरीजों के जीवन की गुणवत्ता और जीवित रहने की संभावना को बेहतर बना सकता है।“

यह केंद्र मरीजों को बिना किसी रुकावट के इलाज जारी रखने में मदद करने के लिए मजबूत सहायता प्रणालियाँ भी विकसित कर चुका है। दूरस्थ जिलों से आने वाले मरीजों को अस्पताल तक पहुँचने के लिए निःशुल्क परिवहन सुविधा दी जाती है। बाल्को मेडिकल सेंटर की ‘सुख सराय’ सुविधा उपचार के दौरान मरीजों और उनके परिजनों के लिए आवास उपलब्ध कराती है। इसके अलावा, कीमोथेरेपी ले रहे मरीजों को उनके स्वास्थ्य लाभ में मदद के लिए मुफ्त उच्च प्रोटीन आहार भी प्रदान किया जाता है।

वित्तीय चुनौतियों को दूर करने के लिए बाल्को मेडिकल सेंटर का चैरिटेबल फंड मरीजों की डायग्नोसिस में आने वाली कमी और इलाज की लागत को कवर करने में सहायता करता है। यह केंद्र इंडियन कैंसर सोसायटी, नरगिस दत्त फाउंडेशन और कडल फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ मिलकर भी काम करता है, ताकि मरीजों को उनके पूरे कैंसर उपचार के दौरान बेहतर सहयोग मिल सके।

बाल्को मेडिकल सेंटर विभिन्न प्रमुख बीमा प्रदाताओं के साथ भी पैनल में शामिल है और कई सरकारी योजनाओं के तहत उपचार प्रदान करता है, जिससे अधिक मरीज बिना वित्तीय बाधा के स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

बाल्को मेडिकल सेंटर ने अपनी क्षमताओं को और मजबूत करते हुए ‘दा विंची शी’ रोबोटिक सर्जरी सिस्टम को भी शामिल किया है। यह प्रणाली कम चीरे वाली (मिनिमली इनवेसिव) सर्जरी की सुविधा देती है, जिससे रक्तस्राव कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। इससे मरीजों के उपचार परिणाम और समग्र अनुभव में सुधार होता है।

छत्तीसगढ़ में कैंसर से लड़ाई के लिए शुरुआती पहचान और गुणवत्तापूर्ण इलाज तक पहुँच, दोनों पर बराबर ध्यान देना जरूरी है। बढ़ती जागरूकता और उन्नत तकनीक के उपयोग के साथ, बाल्को मेडिकल सेंटर जैसे केंद्र मरीजों के परिणामों में सुधार करने और उन्हें घर के पास समय पर व प्रभावी इलाज का बेहतर अवसर देने में मदद कर रहे हैं।


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