बसना : सड़कों पर जेब्रा क्रासिंग पेंट बनाने ठेकेदार ने नगर में उड़वाये धूल के गुब्बारे, क्या वायु प्रदुषण पर प्रशासन करेगी कार्रवाई ?
बसना नगर की सड़कों में धूल का उड़ना अब आम बात हो चुकी है, जिससे नागरिकों को राहत देने नगर पंचायत प्रशासन पूरी तरह से नाकाम है, सड़कों पर सफाई नहीं होने से यहाँ धूल की चादर जम चुकी जिसके ऊपर से तेज गति में गाड़ियां गुजरने पर धूल का गुब्बारा बन जाता है।
बसना नगर में बन रहे नये गौरव पथ का कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है, ठेकेदार ने फुटपाथ के लिए लगाई जाने वाली टाइल्स का काम भी अधूरा छोड़ दिया है, ठेकेदार द्वारा किए जा रहे इस गुणवत्ताहीन कार्य पर कई बार स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाये, शिकायत भी की लेकिन इससे शासन प्रशासन को किसी तरह का कोई फर्क नही पड़ा. ये शिकायतें शायद डस्टबिन में डाल दिए गए. जिसके चलते आज ठेकेदार के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब नगर में उनके द्वारा स्वच्छता की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है, ठेकेदार खुद ही धूल के गुब्बारे उड़ाने में लग गए हैं. चाहे इससे नागरिकों का स्वास्थ्य ख़राब हो या दुर्घटना इससे उन्हें कोई फर्क नही पढ़ता. क्योंकि शासन प्रशासन को प्रदुषण तभी दिखाई देता है जब किसान अपने खेतों की पराली जलाता है. उद्योगपतियों के लिए तो ये पहाड़ और जंगल भी कटवा देते है.
देश भर में अभी ठंड का सीजन चल रहा है, जिसकी वजह से कोहरा छाया होता है, सड़कों पर विजिबिलिटी शून्य हो जाती है, साथ ही प्रदूषित हवा से लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है, दमा अस्थमा जैसी समस्या होने लगती है. ऐसे में अगर हवा में धूल उड़ाई जाए तो यह समस्या अत्यंत ही गंभीर हो सकती है.
बसना नगर में गौरव पथ पर गुणवत्ताहीन कार्य कर रहे ठेकेदार द्वारा अब सड़कों पर जेब्रा क्रासिंग के लिए सफेद और पीले रंग से पोताई की जा रही है. जिसके लिए आज सुबह करीब 4 बजे ठेकेदार ने मजदूर भेजकर सड़क पर धूल उड़ाने की मशीन चलाई, जिससे चारों तरफ धूल का गुब्बारा बन गया दिखाई देना पूरी तरह से बंद हो गया. यह धूल उड़कर आसपास के वातावरण में फ़ैल गया जिससे हवा में उड़ने वाले सूक्ष्म कणों की मात्रा अधिक हो गई. और ये धूल लोगों के घरों के अंदर भी आ गए, अब सांस लेने पर यह ना दिखाई देने वाले धूल के कण लोगों के फेफड़े में जायेंगे जिससे उन्हें दमा अस्थमा, सर्दी, खांसी, एलर्जी जैसी कई गंभीर बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है.
ऐसे में सवाल यह है कि क्या वायु प्रदुषण पर सिर्फ किसानों को जिम्मेदार ठहराया जायेगा या फिर ऐसे ठेकेदारों पर भी किसी तरह की कोई कार्रवाई की जाएगी जो नियमों को ताक में रखकर नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है.