शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में रूसा 2.0 (प्रिपरेटरी ग्रांट) के अंतर्गत तृतीय दिवस का आयोजन ज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार के दृष्टिकोण से अत्यंत सफल एवं प्रेरणास्पद
शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में रूसा 2.0 (प्रिपरेटरी ग्रांट) के अंतर्गत आयोजित एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम शोध एवं नवाचार की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो रहा है। यह प्रशिक्षण 23 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका संचालन उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा राज्य परियोजना कार्यालय, रूसा, छत्तीसगढ़ के सहयोग से किया जा रहा है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने प्रशिक्षण की प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि कम्प्यूटर आधारित अनुसंधान पद्धतियाँ वर्तमान समय में मटेरियल साइंस एवं नैनोमटेरियल अध्ययन का अभिन्न अंग बन चुकी हैं। आयोजन समिति सदस्य डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि “कम्प्यूटर आधारित मटेरियलध्नैनोमटेरियल नवाचार” विषय पर केंद्रित इस प्रशिक्षण में रायपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों के विज्ञान संकाय के प्राध्यापक सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं।
तृतीय दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. कुसुमांजली देशमुख, शासकीय वी.वाई.टी. महाविद्यालय, दुर्ग उपस्थित रहीं। उनका व्याख्यान अत्यंत विस्तृत, शोधपरक एवं विश्लेषणात्मक रहा। उन्होंने सर्वप्रथम एनीमेशन, सिमुलेशन तथा मॉडल प्रस्तुतीकरण के बीच के मूलभूत अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि किस प्रकार ये तीनों उपकरण वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझाने एवं जटिल प्रक्रियाओं के विश्लेषण में सहायक होते हैं।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर तकनीकी विकास के प्रभाव को विभिन्न वैज्ञानिक मानचित्रों एवं डेटा विजुअलाइजेशन के उदाहरणों के माध्यम से समझाया। मटेरियल साइंस के संदर्भ में उन्होंने शोध की प्रमुख चुनौतियोंकृउन्नत प्रयोगशालाओं की उपलब्धता, आधारभूत संरचना की कमी, सटीक पैरामीटर चयन एवं अनुकूलन (वचजपउप्रंजपवद)कृपर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग को प्रयोगात्मक शोध के साथ समन्वित किया जाए, तो संसाधनों की कमी के बावजूद उच्च गुणवत्ता के परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
बैंड संरचना, बैंड-गैप मॉड्यूलेशन तथा विभिन्न भौतिक एवं रासायनिक पैरामीटरों के माध्यम से गुणधर्मों में होने वाले परिवर्तनों की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की गई। उन्होंने “ग्रीन लीफ रूट” को थिन फिल्म निर्माण की एक पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत पद्धति के रूप में रेखांकित किया, जो भविष्य के पर्यावरण-अनुकूल अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भौतिकी के विविध क्षेत्रों-बायोफिजिक्स, मटेरियल फिजिक्स, फेज फील्ड मॉडल तथा हाई एनर्जी फिजिक्स के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग किस प्रकार बहुविषयी शोध में उपयोगी सिद्ध हो रही है। उनका व्याख्यान न केवल सैद्धांतिक रूप से समृद्ध था, बल्कि शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी भी रहा।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. मोहन एल. वर्मा, शंकरा टेक्निकल कैंपस, भिलाई द्वारा कम्प्यूटेशनल तकनीकों की भूमिका पर व्याख्यान दिया गया। इसके पश्चात आयोजित हैंड्स-ऑन सत्र में डॉ. मोहन एल. वर्मा एवं डॉ. रश्मि किरण टोप्पो ने लिनक्स एवं उबंटू प्लेटफॉर्म पर सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन, कमांड संचालन एवं डेटा विश्लेषण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. अखिलेश जाधव ने आगामी सत्रों की रूपरेखा साझा की, वहीं आयोजन समिति सदस्य डॉ. लखपति पटेल ने बताया कि प्रशिक्षण में सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दोनों आयामों को समान रूप से महत्व दिया गया है। समग्र रूप से तृतीय दिवस का आयोजन ज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार के दृष्टिकोण से अत्यंत सफल एवं प्रेरणास्पद रहा।