वेदांता एल्युमीनियम ने ‘तरक्की की तैयारी’ अभियान के साथ महिला दिवस मनाया
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में एक महीने तक चलने वाला बहु-स्थानीय अभियान, जिसमें विशेषज्ञ कार्यक्रम, स्वास्थ्य पहल और जमीनी स्तर पर सामुदायिक गतिविधियाँ शामिल होंगी
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 से पहले, वेदांता एल्युमीनियम, जो भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी है, ने #TarakkiKiTaiyaari (#तरक्कीकीतैयारी) नाम से एक अभियान शुरू किया है। यह अभियान इस बात पर जोर देता है कि देश की वास्तविक प्रगति समावेशी भागीदारी पर आधारित होती है। इस पहल के तहत किरण बेदी और अरुणिमा सिन्हा जैसे विचार-नेताओं को कर्मचारियों के साथ संवाद के लिए जोड़ा गया है। इसके साथ-साथ सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर और कर्मचारियों के स्वयंसेवी प्रयासों से चलने वाली विभिन्न पहलें भी आयोजित की जा रही हैं।
भारत के धातु, खनन और विनिर्माण क्षेत्रों में तेज़ वृद्धि के बावजूद महिलाओं की भागीदारी अभी भी काफी कम है। जैसे-जैसे दुनिया अधिक धातु-आधारित और तकनीक-प्रेरित भविष्य की ओर बढ़ रही है, वेदांता एल्युमीनियम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि महिलाएँ केवल शामिल ही न हों, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी आगे आएँ। अपने मूल में #TarakkiKiTaiyaari (#तरक्कीकीतैयारी) अभियान आकांक्षा से आगे बढ़कर तैयारी पर ध्यान देता है। यह मानता है कि महत्वाकांक्षा तो बहुत है, लेकिन अवसरों को सोच-समझकर विकसित करना पड़ता है। कंपनी की ‘पीपल फिलॉसफी’ भी इसी विचार को अपनाती है। वर्तमान में महिलाओं की भागीदारी कार्यबल में 21% है और लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक इसे 30% तक पहुँचाया जाए। इस बदलाव को तेज़ करने के लिए कंपनी ने एंट्री-लेवल पदों पर 50% महिलाओं की भर्ती को प्राथमिकता दी है, ताकि मजबूत और विविध प्रतिभा-श्रृंखला तैयार हो सके।
वेदांता एल्युमीनियम में महिलाओं की प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता उसके कार्यों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के रूप में दिखाई देती है। कंपनी ने अपने झारसुगुडा एल्युमीनियम स्मेल्टर में भारत की पहली पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित पॉटलाइन शुरू की है। साथ ही, चरणबद्ध तकनीकी प्रशिक्षण और व्यवस्थित क्षमता विकास के माध्यम से 100 से अधिक महिलाओं को स्मेल्टिंग और उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नियुक्त किया गया है। कंपनी ने पहली पूर्णतः महिला लोकोमोटिव इंजन क्रू भी शुरू की है और अपनी ऑल-वुमन फायरफाइटिंग टीम अग्निवाहिनी का विस्तार करते हुए इसमें 100 से अधिक प्रशिक्षित महिलाओं को शामिल किया है। कंपनी अपने नेतृत्व समूहों में भी महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ा रही है, ताकि निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में उनका मजबूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। इसके विभिन्न स्थानों पर कंट्रोल रूम अब मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, खनन स्थलों पर माइनिंग इंजीनियर के रूप में तथा डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। यह वेदांता एल्युमीनियम के एक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने के प्रयासों को दर्शाता है।
घाना सौदामिनी, जो झारसुगुडा एल्युमीनियम स्मेल्टर में ऑल-वुमन पॉटलाइन की डिप्टी इन-चार्ज हैं, ने कहा, “भारत की पहली पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित स्मेल्टर लाइन का हिस्सा होना मुझे याद दिलाता है कि कोई भी बाधा इतनी मजबूत नहीं होती जिसे तोड़ा न जा सके। सही सोच और कंपनी के मजबूत मूल्यों के साथ विकास की संभावनाएँ असीमित हो जाती हैं। इस यात्रा ने मुझे आगे बढ़ते रहने का साहस दिया है और मुझे उम्मीद है कि यह अन्य महिलाओं को भी अपने सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरित करेगी।
राजीव कुमार, सीईओ, वेदांता एल्युमीनियम ने कहा, “भारत के लो-कार्बन भविष्य में धातु और खनन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और यह आवश्यक है कि इस परिवर्तन को आकार देने में महिलाएँ समान रूप से भाग लें। यह वेदांता एल्युमीनियम में हमारा मानना है कि विविधता, समानता और समावेशन केवल सांस्कृतिक मूल्य ही नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक ताकत भी हैं, जो हमारे व्यवसाय को अधिक नवाचारी, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार बनाती हैं।‘#TarakkiKiTaiyaari’ (#तरक्कीकीतैयारी) का उद्देश्य इस उद्योग को महिलाओं के लिए एक पसंदीदा करियर विकल्प बनाना है। वर्ष 2030 तक कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को 30% तक पहुँचाने की हमारी प्रतिबद्धता इसी दिशा में एक ठोस कदम है।”
वेदांता एल्युमीनियम अपने विभिन्न कार्यस्थलों पर #TarakkiKiTaiyaari (#तरक्कीकीतैयारी) अभियान को पूरे महीने चलने वाली कई प्रभावशाली गतिविधियों के माध्यम से मनाएगा, जो कार्यस्थलों के साथ-साथ आसपास के समुदायों तक भी पहुँचेंगी। इस कार्यक्रम में महिला रोल मॉडल्स के साथ इंटरैक्टिव सत्र, सम्मान समारोह, टाउनहॉल बैठकें, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कैंसर जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम, सामुदायिक संपर्क अभियान, स्वास्थ्य शिविर और कर्मचारियों द्वारा संचालित स्वयंसेवी पहलें शामिल हैं। इसके अलावा जामखानी खदान, घोघरपल्ली खदान और कुरालोई खदान खनन क्षेत्रों में चलाए जाने वाले सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से 1,700 से अधिक महिलाओं को जोड़ा जाएगा। इन कार्यक्रमों में समुदायिक उत्सवों के साथ-साथ अग्रिम पंक्ति की स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं- मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएसएचए) और स्वयं सहायता समूहों का सम्मान भी किया जाएगा।
प्रेमाबती माझी, जो मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएसएचए) कार्यकर्ता हैं और बिलिनमुंडा गाँव की निवासी हैं, जो घोघरपल्ली खदान के पास स्थित है, ने कहा, “वेदांता एल्युमीनियम हमारे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार समर्थन दे रही है और हम आशा कार्यकर्ता इन पहलों को गाँव-गाँव तक पहुँचाने में मदद कर रहे हैं। हमारे काम के लिए मिलने वाली यह पहचान हमें अपने समुदाय की और अधिक समर्पण के साथ सेवा करने के लिए प्रेरित करती है।”
वेदांता एल्युमीनियम की विविधता यात्रा को दर्शाने वाली एक विशेष फिल्म अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस यानी 8 मार्च को लॉन्च की जाएगी। इन सभी सामूहिक प्रयासों के माध्यम से वेदांता एल्युमीनियम यह संदेश मजबूत करना चाहता है कि समावेशी प्रगति अवसरों के निर्माण, क्षमताओं को मजबूत करने और कार्यस्थल तथा समुदाय दोनों में महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाने से संभव होती है।