महासमुंद : दृष्टिबाधित दिव्यांग लक्की यादव ने अपने सपनों को ही ताकत बना लिया
लक्की यादव निवासी ग्राम तुमाङबरी, महासमुंद जो दृष्टिबाधित दिव्यांग है। अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दृष्टिबाधित होने के बावजूद लक्की ने अपने सपनों को सीमित नहीं होने दिया, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लिया। लक्की यादव समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित स्वैच्छिक संस्था फॉर्चुन फाउंडेशन के पूर्व के छात्र है। बचपन से ही लक्की के सामने कई चुनौतियां थीं। जहा ंसामान्य बच्चों के लिए रोजमर्रा के काम आसान होते हैं, वहीं लक्की को हर कदम पर संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन उनके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हमेशा जीवित रहा। परिवार, विशेषकर उनके पिता श्री कुमार यादव का सहयोग और प्रोत्साहन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। लक्की ने खेलों में अपनी रुचि को पहचानते हुए एथलेटिक्स को अपना लक्ष्य बनाया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत की।
वर्ष 2020-21 में पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 400 मीटर एवं 1500 मीटर दौड में रजत पदक तथा वर्ष 2021-22 में 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। वर्तमान वर्ष 2026 में दिल्ली में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में भारतीय टीम में छत्तीसगढ़ से एकमात्र खिलाड़ी के रूप में उनका चयन हुआ। उक्त प्रतियोगिता में सम्मिलित होने के लिए उन्हें जिला प्रशासन समाज कल्याण विभाग द्वारा आर्थिक सहायता प्रदाय किया गया। प्रतियोगिता में कड़ी मेहनत और समर्पण दिखाते हुए 1500 मीटर दौड़ के पहले दो राउंड में अपनी बढ़त बनाए रखा किन्तु अंतिम राउंड में पदक प्राप्त नहीं कर सकें। उन्होंने हार नहीं मानी और 12 मार्च 2026 को 400 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर जिले, प्रदेश एवं देश का नाम रोशन किया। आज लक्की यादव एक खिलाड़ी के रूप में सभी खिलाड़ियों एवं लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।