बसना : किसानों के पराली जलाने पर होता है वायु प्रदुषण, व्यापारी नगर में रोज लगा रहे आग, प्रशासन ने मुंदी आँख कोई कार्रवाई नही!
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा सप्ताह के मंगलवार को समय सीमा की बैठक ली जाती है, जिसमे अधिकारी कर्मचारियों को कई तरह के दिशा निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन क्या धरातल पर इन निर्देशों का पालन हो पाता है? या यह निर्देश केवल कागज़ और मीडिया तक ही सीमित रहा जाते हैं.
कलेक्टर द्वारा स्वच्छता को लेकर कई तरह के निर्देश दिए जाए हैं, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने की बात कही जाती है. लेकिन महासमुंद जिले में एक नगर ऐसा भी है जहाँ डोर-टू-डोर कचरा जलाया जा रहा है. मानो यहाँ कचरा जलाकर वायु प्रदुषण करने की प्रतियोगिता चल रही हो, आम नागरिग के साथ नगर पंचायत के स्वच्छता कर्मी भी सुबह कचरा इकठ्ठा कर उसे ले जाने की बजाये वहीं आग लगाकर चले जाते हैं. लेकिन इस देश में वायु प्रदुषण तो केवल किसानों के पराली जलाने पर होता है, जब किसान पराली जलाता है तभी शासन-प्रशासन की आँख खुलती है. व्यापारी और नगर में कई जगह खुले में लग रही आग से तो वातावरण शुद्ध हो रहा है.
यहाँ हम बात कर रहे हैं महासमुंद जिले के बसना नगर की, बसना नगर के वार्ड क्रमांक 06 सहित कई जगहों में सड़क किनारे खुले आम आग लगाई जा रही है, जिसमे ऑइल फ़िल्टर, रबर प्लास्टिक, पॉलीथिन, ऑइल से सने काले कपड़े भी होते हैं, जो अपने कचरे नगर पंचायत गाड़ी को देने की बजाय, अपनी दूकान बंद करते समय खुले में इकट्ठा कर आग लगा देते हैं. और घर चले जाते हैं. मानो नगर में वायु प्रदुषण की प्रतियोगिता चल रही हो.
हालांकि कचरे की शिकायत स्वच्छता ऐप में करने पर उसपर कार्रवाई करए हुए सफाई की जाती है, लेकिन उसी ऐप में खुले में लगी हुई आग की शिकायत करने पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नही होती. सरकार ने खुले में आग लगाने वाले पर कार्रवाई करने हेतु कई नियम बनायें हैं, इसमें अपराध दर्ज करने से लेकर जेल और जुर्माना जैसे भी प्रावधान किए है. लेकिन नगर में व्यापारियों द्वारा आग लगाने पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नही होती, जो घंटो तक जलते रहते हैं, साथ ही किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली से ज्यादा हानिकारक होते हैं, किसान फसल के कटने के बाद आग लगाते हैं, बसना नगर में प्रतिदिन कई जगहों पर आग लगाई जा रही है.