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महासमुंद : मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना से मिली मोटर-साइकिल और आइस बॉक्स, तालाबों से मछलियाँ खरीदकर राकेश करते हैं स्थानीय हाट-बाजारों में बिक्री

महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम तुमगांव के निवासी राकेश धीवर एक साधारण परिवार से आते हैं। मछली पालन उनके परिवार का परंपरागत व्यवसाय रहा है और आज समय के साथ यह उनकी आजीविका का मुख्य आधार भी बन गया है। उनकी इस प्रगति में मत्स्य विभाग का विशेष योगदान रहा है। विभाग द्वारा उन्हें मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना का लाभ प्राप्त हुआ। इस योजना के अंतर्गत मिली मोटर-साइकिल और आइस बॉक्स की सहायता से अब वे दूर-दराज के गांवों और हाट-बाजारों तक आसानी से मछली पहुंचा पाते हैं, जिससे उनके व्यवसाय का विस्तार हुआ है और आय में भी वृद्धि हुई है।

राकेश धीवर के पिता विश्राम धीवर प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति तुमगांव के सदस्य रहे हैं। इससे प्रेरित होकर राकेश का भी मछली पालन एवं विक्रय कार्य की ओर रुझान बढ़ा। आज यह कार्य उनके पूरे परिवार के सहयोग से संचालित हो रहा है। उनके परिवार में पत्नी एवं दो पुत्र हैं, जो मछली विक्रय कार्य में सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं और वर्तमान में सशक्त पारिवारिक उद्यम का रूप ले चुका है।

राकेश धीवर द्वारा प्रतिदिन आसपास के तालाबों से मछलियाँ खरीदकर स्थानीय हाट-बाजारों में बिक्री किया जाता है। वे प्रतिदिन लगभग 2 क्विंटल मछली का व्यापार करते हैं। इस कार्य में प्रतिदिन लगभग 20 हजार रुपए की लागत आती है, जबकि विक्रय से 24 हजार रुपए तक की आय होती है। इस प्रकार उन्हें प्रतिदिन लगभग 4 हजार रुपये का सकल लाभ प्राप्त होता है। मजदूरी एवं अन्य खर्चों को घटाने के बाद वे प्रतिदिन एक हजार से 1,500 रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर लेते हैं, जो उनके परिवार के लिए एक स्थिर आय का स्रोत बन गया है। इस तरह प्रतिमाह लगभग 45 से 50 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी होती है।

इसके अलावा राकेश धीवर अपने पैतृक खेत में कृषि कार्य भी करते हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए हैं। इस प्रकार मछली विक्रय और कृषि कार्य के समन्वय से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया है।


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