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बसना : राष्ट्र को खड़े करने के लिए नागरिकों को अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन स्वाभाविक रूप से करना चाहिए - प्रेम शंकर सिदार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला महासमुंद का मंगल भवन बसना में छत्तीसगढ़ प्रांत प्रमुखजन गोष्ठी का कार्यक्रम रखा गया, जिसमे मुख्य वक्ता प्रेम शंकर सिदार मध्य क्षेत्र सह प्रचारक, एवं मंचस्थ यज्ञराम सिदार विभाग संघचालक राजिम विभाग मुख्य रूप से शामिल रहे।

प्रमुखजन गोष्ठी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रेम शंकर सिदार ने संघ शताब्दी वर्ष का परिचय एवं संघ के कार्यक्रमों का विवरण देते हुए कहा कि हमारा देश धन- धान्य,शास्त्र -शस्त्र से संपन्न होने के बावजूद गुलाम कैसे हुआ। वह 2000 साल में सभी देशों की आंतरिक स्थिति को व्यक्त करने वाले कुछ आंकड़े रखते हुए कहा कि सेमल हंटिंग नामक विद्वान ने 1750 ईस्वी में कहा था, कि वर्ल्ड जीडीपी में भारत का शेयर 24% था। किंतु अंग्रेजों के आने के बाद यहां आर्थिक विपन्नता आई। संघ की विचारधारा को प्रारंभ करते समय डॉक्टर हेडगेवार जी के मन में भी यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठा, कि यह विपन्नता क्यों आई? इसका कारण क्या है ?इस पर उनका विचार था, कि इसका पहला कारण देश की जनता में राष्ट्रीय चेतना का अभाव है।

इस प्रकार डॉक्टर हेडगेवार के चिंतन को बताते हुए उन्होंने इसके दो भाग बताए पहला या तो विदेशी आक्रांता शक्तिशाली थे, यह हो सकता है। दूसरा, अपने लोगों में राष्ट्र प्रथम की भावना की कमी ।आगे उन्होंने राष्ट्रीय चेतना का अर्थ बताया, कि राष्ट्र प्रथम या राष्ट्र के लिए सर्वस्व बलिदान कर सकें। इसके लिए उन्होंने चित्तौड़ के पन्ना धाय के त्याग का उदाहरण दिया। जिसमें पन्नाधाय में अपने पुत्र का बलिदान राजा उदय सिंह को बचाने के लिए दिया। साथ में गुरु गोविंद सिंह जी के वीर पुत्रों का जोरावर सिंह एवं फतेह सिंह जी का भी उल्लेख किया।

उन्होंने आगे राष्ट्रीय चेतना का अर्थ बताते हुए कहा समाज में प्रत्येक व्यक्ति में "मैं रहूं या ना रहूं यह देश रहना चाहिए "के भाव होने चाहिए । आगे उन्होंने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के इंडिया विजन 2050 का उदाहरण देते हुए कहा कि आगे राष्ट्र को खड़े करने के लिए नागरिकों को अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन स्वाभाविक रूप से करना चाहिए ।

उन्होंने रॉकेट की खोज भारत में हुई। इसका उदाहरण सहित व्याख्या करते हुए एपीजे अब्दुल कलाम की एक घटना का उल्लेख किया। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने बताया कि 1769 से 1800 तक मैसूर की सेना ने अग्नि तीरों का प्रयोग किया। जिससे अंग्रेजों को बहुत नुकसान हुआ। इन्हीं अंग्रेजों ने उनमें से कुछ तीरों को परिष्कृत कर और उन्नत अस्त्र बनाएं। जो आगे चलकर रॉकेट का रूप लिया। आगे उन्होंने बताया कि अपने पूर्वजों के कार्यों पर गर्व न करना आधीनता का कारण है।

इस कार्य पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ निरंतर कार्य कर रहा है।हम सभी का उद्देश्य इस ग्लानि से समाज को बाहर निकलना है। आगे उन्होंने 1932 में बालासाहेब देवरस जी का समरसता का एक उदाहरण दिया। जिसमें उन्होंने अपने घर की रसोई से समरसता के भाव का जागरण प्रारंभ किया। वर्धा के संघ शिक्षा वर्ग में गांधी जी, जमुनालाल बजाज जी के साथ आगमन पर उन्होंने देखा कि सभी लोग अपना परिचय हिंदू कहकर दे रहे थे। जबकि उसमें से लगभग 30% वंचित समाज के लोग थे। 1964 के कुंभ में साधु संतों एवं शंकराचार्य जी के द्वारा संघ के प्रयास से यह कहा गया कि "सभी हिंदू सहोदर हैं एवं छुआछूत गलत है"। 1989 से 1992 तक संघ ने समाज में राम मंदिर आंदोलन के रूप में एक धार्मिक जागरूकता का कार्य किया। जो 2024 तक फलीभूत हुआ और आगे भी राष्ट्र में राष्ट्रीयता के उदय के भाव जागरण का कार्य सतत चल रहा है।

शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन विषय पर भी बोलते हुए उन्होंने कहा कि पहले बिंदु समाज में समरसता जिससे समाज में जाति बंधन एवं छुआछूत की भावना दूर हो और उसका अपने चरित्र में आत्मसात करना आवश्यक है।

दूसरा बिंदु कुटुंब प्रबोधन जिससे परिवार में सभी मिलजुल कर पूजा करें, भोजन करें एवं साथ में बैठकर विचार विमर्श करें। जो आगे एक दूसरे को जोड़ने में बहुत सहायक होता है ।

तीसरा बिंदु पर्यावरण संरक्षण का है इसमें पानी का संरक्षण प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना एवं पेड़ों का संरक्षण एवं रोपण का आग्रह किया।

चौथा बिंदु नागरिक शिष्टाचार जो कि कैसा जीवन हमारे देश में जीना है। सरकार ने जो नियम निर्धारित किए हैं, हमें उन नियमों का पालन करना चाहिए। जिससे देश आगे बढ़े।

पांचवा बिंदु है, स्वदेशी का भाव ।स्वदेशी का भाव है अपने चरित्र में स्वाभिमान का भाव जगे। हमें अपने देश में निर्मित चीजों का प्रयोग करना चाहिए एवं उसमें गर्व का अनुभव करना चाहिए ।

इस प्रकार संघ का एक आग्रह है कि व्यक्ति, परिवार, समाज, देश एवं दुनिया में पंच परिवर्तन का विचार लोगों में आए। सभी, देश को प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठ बनाएं। ऐसा आग्रह है। कुरीतियों को समाप्त करने पर कार्य करना होगा।


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