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न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर से PM मोदी भी नाराज, बोले- आठवीं के बच्चों को क्या सिखा रहे?

एनसीआरटी विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नाराज हैं। बताया जाता है कि मंगलवार को कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने इसको लेकर अप्रसन्नता जाहिर की थी। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए बनाई गई सामग्री में न्यायपालिका से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को शामिल करने पर आपत्ति जताई। साथ ही विषय की उपयुक्तता और इसे मंजूरी देने की प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठाए। इतना ही नहीं, बैठक में प्रधानमंत्री ने यह भी पूछा कि हम कक्षा 8 के बच्चों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में क्या सिखा रहे हैं?

पूछा अप्रूव कौन कर रहा था?
इस दौरान प्रधानमंत्री ने निगरानी पर भी चिंता जाहिर की। इंडिया टुडे के मुताबिक पीएम मोदी ने पूछा कि मॉनीटरिंग कौन रहा था और क्लासरूम में ऐसी सामग्री को अप्रूव कौन रहा था? प्रधानमंत्री की टिप्पणियां इस बात पर असहजता को दर्शाती थीं कि संवेदनशील संस्थागत मुद्दों को शिक्षा के प्रारंभिक चरण में कैसे पेश किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक मामला शामिल है, जो अब सरकार के भीतर जांच के दायरे में आ गया है। इस मामले ने आयु उपयुक्तता और स्कूल पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और जांच के दौरान लागू सुरक्षा उपायों पर सवाल उठा दिए हैं।

इस बात पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई कि सामग्री में संशोधन किया जाएगा या इसे वापस किया जाएगा। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले को उठाया जाएगा, जिसमें जवाबदेही और पाठ्यपुस्तक अनुमोदन से संबंधित व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाएगा।

क्या है विवाद
नई पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक वाले खंड में कहा गया है कि भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों का भारी बोझ और न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों में से हैं। पाठ्यपुस्तक की सामग्री में यह भी कहा गया है कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं जो न केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है, बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐक्शन
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि कार्यवाही का उद्देश्य किसी भी वैध आलोचना को दबाना या न्यायपालिका की समीक्षा के अधिकार के प्रयोग को रोकना नहीं है। सुनवाई शुरू होने पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से बिना शर्त माफी मांगी। प्रधान न्यायाधीश हालांकि इससे संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी के पत्र में माफी का एक भी शब्द नहीं है, बल्कि इसमें अध्याय को सही ठहराने की कोशिश की गई है। पीठ ने कहा कि पुस्तक में शब्दों और अभिव्यक्तियों का चयन असावधानी के कारण या अनजाने में हुई गलती नहीं कहा जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस उम्र में छात्रों को पक्षपातपूर्ण विमर्श से अवगत कराना सरासर अनुचित है, क्योंकि इससे मूलभूत गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की।


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