सरायपाली : लिमगांव मिडिल स्कूल में चलता रहा ‘बाहरी मास्टर’ का खेल, विभाग सोता रहा, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संभागीय संयुक्त संचालक ने जारी किया कारण बताओ नोटिस।
सरायपाली। शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव में बाहरी युवक से सालभर अध्यापन कराने के चर्चित मामले में अब शिक्षा विभाग की गर्दन फंसती नजर आ रही है। जांचकर्ताओं ने 10 मार्च को रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सौंप दी थी, जिसके बाद डीईओ ने 01 अप्रैल को कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए प्रकरण संभागीय संयुक्त संचालक रायपुर भेज दिया। मामला गंभीर पाए जाने पर 13 अप्रैल को संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
यह वही मामला है, जिसमें राजनीतिक दबाव के चलते जांच अधिकारियों ने शुरुआत में जांच से ही हाथ खड़े कर दिए थे।
मिडिल स्कूल के प्रधानपाठक धनीराम चौधरी लकवाग्रस्त थे, लेकिन विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय बाहरी युवक जितेन्द्र साहू को 6500 रुपये मासिक देकर अध्यापन कार्य में लगा दिया। जो नियम विपरीत है। इसकी लिखित जानकारी तत्कालीन बीईओ प्रकाश चन्द्र मांझी को पहले ही दी जा चुकी थी, फिर भी पूरे मामले पर मिलीभगत करके पर्दा डाले रखा।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब तत्कालीन एसडीएम सरायपाली हेमंत रमेश नंदनवार आइएएस ने औचक निरीक्षण किया। जांच में शिक्षकों ने खुद बयान देकर स्वीकार किया कि पिछले एक वर्ष से धनीराम चौधरी की जगह बाहरी युवक जितेन्द्र साहू ही बच्चों को पढ़ा रहा था।
जांच में तत्कालीन बीईओ प्रकाश चन्द्र मांझी, एबीईओ देवनारायण दीवान व जितेन्द्र रावल, प्राचार्य ठण्डाराम टिकूलिया, संकुल समन्वयक गिरधारी लाल पटेल तथा शिक्षक दिनेश पटेल व मनीष साहू दोषी पाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक अब भी राजनीतिक संरक्षण के दम पर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश जारी है।